
भीखमखेड़ा शिवपालगंज से मिला हुआ एक गाँव है, जो ‘यूनानो–मिस्र–रोमाँ’ की तरह जहान से नहीं मिटा है। शिवपालगंजवाले बेवकूफ़ी के मारे उसे मिटा हुआ समझते हैं। #संस्कृत
भीखमखेड़ा 🔃 शिवपालगंज
Joined May 2012
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तुमने मास्टर मोतीराम को देखा है कि नहीं? पुराने आदमी हैं, दारोगाजी उनकी बड़ी इज्जत करते हैं। वे दारोगाजी की इज्जत करते है। दोनो की इज्जत प्रिंसिपल साहब करते है। कोई साला काम तो करता नही है, सब एक-दूसरे की इज्जत करते हैं।
#रागदरबारी
अलग लेवल का कंप्लीमेंट है 😂
Replying to @33kVA
आपका नाम किसी उपन्यास में पढ़ा था। याद नहीं आ रहा, उसका नाम। पर मस्त था। एक नंबर के bhangedi थे
‘बबुनी बीड़ी पियत जात रहली डोली में
आग लगवली चोली में ना।
बबुनी के माई बाप शौकीन
दिहले बीड़ी सलाई कीन
आदत सिखले रहली नइहर के हमजोली में
आग लगवली चोली में ना।’
~ @AuthorAtul के उपन्यास चाँदपुर की चंदा से
रामाधीन भीखमखेड़वी(अध्वर्यु माध्यान्दिन वाजसनेय) retweeted
All anti-Hindu cults like Arya Samaj, ISKCON, Swaminarayan, Gayatri Parivar, Isha, Brahmakumaris, etc. use a similar format to cut the roots of Hindus.
Replying to @StatVigil
ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार अहीर मुख्य रूप से पशुपालक समुदाय थे। 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में संस्कृतीकरण आंदोलन के तहत उन्होंने यदु वंश से संबंध जोड़ते हुए यादव नाम अपनाया। 1910 में अहीर यादव क्षत्रिय महासभा और 1924 में अखिल भारतीय यादव महासभा बनी। 1931 की जनगणना में कई पशुपालक समूहों को यादव के रूप में दर्ज किया गया। यह उस दौर की सामाजिक गतिशीलता का हिस्सा था।
किसने कहा था? किसको कहा था??
“एक बिल्डर की बेटी बिना कॉलेज की डिग्री लिए भारत की सभ्यता को जाने बिना, चेहरे पर गंभीरता ओढ़े भारत का भविष्य बन गई है।”
हजारों साल से अनाज और दूध का उत्पादन किया फिर भी देश की बड़ी आबादी कुपोषित रह गई?
ये चून मंगता मुझे बासी माठा भात खाने का व्यंग्य कर रहा है,
अबे नून और चून मंगते हम लोग मेहनतकश किसान और पशुपालक है,
धरती का सीना चीरकर अपने और दुनिया के लिए अनाज उगाते हैं,
पशुओं का पालन करके मेहनत से दूध दही माठा भी उत्पादित करते हैं,
और उसका सेवन भी करते हैं,
तू समय से नून और चून मांगने घर से निकल जाना,
नहीं तो पड़ाईन और अंडा बच्चा सब भूखा मर जाएगा,
रामाधीन भीखमखेड़वी(अध्वर्यु माध्यान्दिन वाजसनेय) retweeted
हमारी छोटी बिटिया के शुभ विवाह के पावन अवसर पर अपने पैतृक गांव नदवाँ (बाढ़) में एक भव्य घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।
इस रोमांचक प्रतियोगिता में भारतवर्ष के कोने-कोने से एक से बढ़कर एक नामी एवं चर्चित घोड़े अपनी रफ्तार, कौशल और दमखम का प्रदर्शन करने पहुंचेंगे।
राजकुमार भाटी पर कौन-सी कारवाई किए थे आप?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तो सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग ली है। राजकुमार भाटी ने कब माफी मांगी है?
मानवीय भूलों के लिए तो क्षमा किया जा सकता है, ‘ईशनिंदा’ के लिए कभी नहीं। ऐसे दुष्मुखी लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगाना ही समाज के लिए श्रेयस्कर है। पूरे देश में इनके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं, नई अनुमति नहीं दी जाए और सार्वजनिक जीवन में हर सच्चा सनातनी इनका पूर्ण बहिष्कार करे, यही इनके अक्षम्य पाप का दंड होना चाहिए, नहीं तो वो भी ईशनिंदा के पाप का भागी बनकर अपना लोक-परलोक बिगाड़ लेगा।
अगर दुर्भावना से भरा ऐसा व्यक्ति जीवन भर भी एकांतवास करके अपने किये का पश्चाताप और प्रायश्चित करेगा तो भी कोई भी धर्म प्रधान आस्थावान उसे माफ़ नहीं करेगा। मनुष्य का दंभ इतना भी नहीं होना चाहिए कि वो अपने को ईश्वर से ऊपर समझने लगे।
वैधानिक कार्रवाई हो।
कपड़ों से पहचान सकते हैं।
Three BSF personnel (including a Company Commander) were attacked with sticks and bamboo by a mob near the India- Bangladesh border in Ashabari/Boxanagar, Tripura.
The attackers surrounded their vehicle, injured all three jawans, and attempted to snatch their weapons.
This is not a “protest”, this is a direct assault on border security forces in a known smuggling corridor. Such incidents cannot be normalized... A gun without bullets is a toy & a gun with bullet but without permission is a bigger shame🥺...
BSF personnel may get injured, but if they can't use the toys which they are carrying, then why to send them in such areas?🤔
@narendramodi @AmitShah @rajnathsingh @DrSJaishankar @rashtrapatibhvn
जैसे फिरोज जहाँगीर जी के वंशज दत्तात्रेय कौल ब्राह्मण हो गए।
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रामाधीन भीखमखेड़वी(अध्वर्यु माध्यान्दिन वाजसनेय) retweeted
जंजीरों में कैद करके ज़ैनब को 750 किमी दूर कुफा (इराक) से दमास्कस (सीरिया) ले जाया गया।
ये लंबी यात्रा जंजीरों में कैद बच्चों और महिलाओं पर बहुत भारी पड़ी और कई ने सर्दियों में तड़पकर दम तोड़ दिया। दमास्कस में पहुँचने के बाद उन्हें 72 घंटों तक बाज़ार के चौराहे पर खड़ा रखा गया।
उस समय जंग जीतने वाली फौज हारने वाली फौज के लोगों का कटा हुआ सिर साथ लेकर जाती थी और अपनी जीत का जश्न मनाती थी। इस पूरे सफर में जैनब के साथ उसके भाई हुसैन और अब्बास का कटा हुए सिर साथ लाया गया था।
बाद में यजीद से ज़ैनब ने माँग की थी की उन्हें शहीदों के सिर लौटा दिए जाएं और उन्हें एक घर दिया जाए जहाँ वो मातम मना सकें।।मोहम्मद साहब के गुजर जाने के तीन महीने में ही उनकी बेटी फातिमा की घर में घुसकर निर्मम हत्या कर दी गई थी।
उनके दामाद अली को रमजान में नमाज पढ़ते हुए मारा गया। बड़े नवासे को जहर दिया गया और छोटे नवासे को कर्बला के मैदान में तीन दिन तक भूख और प्यास से तड़पाने के बाद शहीद कर दिया गया।
जैनब मोहम्मद साहब की नवासी थी जो जंजीरों में कैद नए खलिफा यजीद के सामने खड़ी थी। कमाल की बात ये थी जब ये सब हो रहा था उस समय ना अमेरिका बना था, ना इजरायल था, ना हथियार बेचने वाली कंपनियाँ थी और जो ये सब कर रहे थे वो भी कोई गैर नहीं थे।
ये जौहर करती औरतें, तबाह होते विजननगर और देवगिरी, लाशों की बेकद्री, कटे हुए सिरों के पिरामिड ये सब तो भारत में बाद में आया। इस मानसिकता का सबसे पहला पीड़ित मोहम्मद साहब का परिवार ही बना। उधर कर्बला के मैदान में 70 का सामना हजारों से था, इधर चमकौर के युद्ध में 40 का 10 हजार से।
उधर मोहम्मद साहब का परिवार था, इधर गुरू गोविंद सिंह का। उधर शहीद हुसैन का कटा शीश उनकी चार साल की बेटी को खाने की थाल में सजा कर दिया गया, इधर दारा का कटा शीश शाहजहां को खाने की थाल में दिया गया। उधर जैनब यजीद से अपने भाईयों का कटा हुआ शीश माँग रही थी ताकि उनका मातम मनाया जा सके, इधर सोनीपत का कुशाल सिंह दहिया गुरू तेगबहादुर के शीश को ससम्मान वापस आनंदपुर साहिब भेजने के लिए अपना सिर काटकर मुगल सेना को सौंप रहे थे।
उधर शहीद हुसैन की छोटी बेटी को तड़पाया गया, इधर गुरू गोविंद सिंह के छोटे बच्चों को जिंदा दीवार में चूनवा दिया गया। उधर जैनब को कुफा (इराक) से दमास्कस ले जाया गया, इधर बंदा वीर बैरागी को जोकर बनाकर हाथी में लादकर लाहौर से दिल्ली लाया गया, जहाँ उनके मुँह में उनके तीन साल के बच्चे का माँस डाला गया। उधर कर्बला शहीदों के शवों की बेकद्री की गई, इधर गुरू गोविंद सिंह के बच्चों को दाह संस्कार के लिए जमीन सोने के सिक्के लगाकर बेची गई। जो जहालत 7वीं शताब्दी में अरब में थी…
वो 17वी शताब्दी में भारत में भी साफ दिख रही थी। फिर भी यजीद तो शैतान था और औरंगजेब जिंदा पीर।
उष्ट्राणाम् विवाहेषु....
Wow what a dazzling couple 😍 ! Many many congratulations @Nidhi and @OmarAbdullah . Wishing you a lifetime of blissful togetherness
रामाधीन भीखमखेड़वी(अध्वर्यु माध्यान्दिन वाजसनेय) retweeted
Sheikh Abdullah was the first person to give a call for the Genocide of Kashmiri Pandits. In his speech in Tragapura in 1931 he said that the task of the Muslim Conference and the Muslims of the valley was to turn out the Hindus. @OmarAbdullah @Nidhi @AdityaRajKaul @rahulpandita
रामाधीन भीखमखेड़वी(अध्वर्यु माध्यान्दिन वाजसनेय) retweeted
#मोतिहारी में #LetsInspireBihar के अंतर्गत नर्सिंग प्रोफेशनल्स के लिए "महिला अधिकार, मेडिकल नेग्लीजेंस और भारत में प्री-नेटल डायग्नोस्टिक कानून" विषय पर रहमानिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंस मोतिहारी में विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया । सभी ने मिलकर 2047 तक विकसित भारत में एक विकसित बिहार के निर्माण का संकल्प लिया ।
























