Ashok Mushroof (@AMushroof) profile picture

कवि,लेखक,विचारक https://teapawt.org/t.co/zBb0u1NAW6

Noida, India
Joined December 2018
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कहानी - जो मुझे मिली, कौन थी - “कहानी में प्रयुक्त सभी नाम, क़िरदार और घटनाएँ लेखक की कल्पना पर आधारित हैं। यदि किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से समानता हो, तो उसे केवल संयोग समझा जाए।” रात के ग्यारह बजे थे। दिल्ली से मनाली जा रही आख़िरी बस ख़राब हो गई थी और मुझे मंडी के एक छोटे से बस स्टॉप पर उतार दिया गया था। बारिश तेज थी, नेटवर्क गायब था और अगली बस सुबह 5 बजे थी। सड़क सुनसान थी। बस स्टॉप की टिन की छत टपक रही थी। तभी सड़क के उस पार से एक आवाज आई। "आपको मनाली जाना है?" मैंने देखा, एक लड़की खड़ी थी। उम्र यही 24-25 साल, हाथ में एक छोटा सा बैग, हल्की नीली साड़ी पहनी हुई, जो इस बारिश और पहाड़ में बहुत अज़ीब लग रही थी। "हाँ, पर बस तो..." "मेरे पास गाड़ी है, मैं मनाली ही जा रही हूँ। आप चाहें तो साथ चल सकते हैं। अकेले यहाँ रात भर रुकना ठीक नहीं।" जा मैं हिचकिचाया। रात, अनजान जगह, अनजान लड़की। पर दूसरी तरफ ठंड और सन्नाटा था। मैंने हाँ कह दी। उसकी पुरानी सफेद एम्बेसडर स्टॉप के पीछे खड़ी थी। अंदर से बिल्कुल साफ-सुथरी।हमने सफ़र शुरू किया। रास्ते भर वो बहुत कम बोली। बस एक बार उसने पूछा, "आप पहाड़ों में पहली बार आए हैं?" "हाँ।" "पहाड़ों में रास्ता भटक जाना आसान है,पर लोग भटकते नहीं,उन्हें भटकाया जाता है," उसने मुस्कुरा कर कहा। उसकी मुस्कान में कुछ अज़ीब सा था। लगभग एक घंटे बाद बारिश और तेज हो गई।अचानक उसने गाड़ी एक पुराने लकड़ी के पुल के पास रोक दी। "क्या हुआ?" "पुल देख लीजिए, कमज़ोर है। आप उतर कर देख लीजिए, गाड़ी निकल पाएगी या नहीं।" मैं उतरा। पुल वाक़ई पुराना था, नीचे तेज नदी बह रही थी। मैंने टॉर्च जलाई और दो क़दम आगे गया। तभी पीछे से जोर की आवाज़ आई। मैं पलटा - गाड़ी वहाँ नहीं थी! मेरा बैग, मेरा फोन, सब गाड़ी में था। मैं चिल्लाया, "हेलो! कहाँ गईं?" कोई ज़वाब नहीं। सिर्फ़ बारिश और नदी की आवाज़। मैं दौड़ कर सड़क पर आया। दूर तक कोई गाड़ी नहीं, कोई रोशनी नहीं। जैसे वो एम्बेसडर हवा में गायब हो गई हो। मैं भीगता हुआ पुल पर खड़ा था। तभी मेरी नज़र पुल के किनारे लगे एक छोटे से पत्थर पर पड़ी। उस पर कुछ लिखा था, मिट्टी हटा कर पढ़ा - "यहाँ 15 जून 1998 को एक बस हादसे में 12 लोगों की मौत हुई थी।" और नीचे एक नाम था - "सुनीता शर्मा, 24 वर्ष।" मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मेरी जेब में जो टिकट था, उस पर तारीख थी - 15 जून। मैं भागा। आधा किलोमीटर भागने के बाद मुझे एक चाय की दुकान की रोशनी दिखी। मैं अंदर घुसा। दुकानदार बूढ़ा था। "बाबा, यहाँ एक सफेद एम्बेसडर देखी? नीली साड़ी वाली लड़की?" बूढ़े ने मुझे ऊपर से नीचे देखा और धीरे से कहा, "तुम भी मिले उससे?" "मतलब?" "हर साल 15 जून को वो मिलती है। 1998 में उसकी शादी थी, मनाली जा रही थी। इसी पुल से उसकी बस नदी में गिर गई थी। तब से हर साल इसी रात वो किसी न किसी मुसाफ़िर को लिफ्ट देती है, ताकि कोई और उस पुल को पार न करे।" "तो मेरा बैग... मेरी गाड़ी..." बूढ़ा हँसा, "वो तो तुम्हारे पीछे है देखो।" मैंने पलट कर देखा। बस स्टॉप पर मेरी वही बस खड़ी थी, जिसमें मैं आया था। मेरा बैग सीट पर रखा था। ड्राइवर कह रहा था, "अरे भाई साहब, कहाँ चले गए थे? बस ठीक हो गई है, चलो।" मैं पसीने से तर था। क्या मैं कहीं गया ही नहीं था? क्या वो सपना था? मैं बस में बैठा। बस जब उसी पुराने पुल से गुज़री तो मैंने खिड़की से बाहर देखा। पुल अब नया बन चुका था,पर नए पुल के पिलर पर वही नाम लिखा था - सुनीता शर्मा। और मेरी सीट के पास, जहाँ मैं बैठा था, एक छोटा सा गीला निशान था, जैसे किसी ने नीली साड़ी पहन कर वहाँ बैठ कर सुखाया हो। बस मनाली की तरफ बढ़ गई, पर एक सवाल मेरे साथ ही चलता रहा - जो मुझे मिली, कौन थी? एक भटकती आत्मा, या किसी ने मेरी जान बचाई थी? #अशोक_मसरूफ़ PIC Credit--ChatGpt
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Good evening friends 😍 यह प्रेम कविता पढ़ें, पसंद आए तो रिपोस्ट जरूर करें 🙏 teapawt.org/writesbylalit/status/2…
तेरे इश्क से रोशन मै यह धरती अंबर कर दूं चांद की उम्र चुरा कर मै अपनी प्रीत अमर कर दूं।। #lovepoetry #hindipoetry #writesbylalit
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दिल ने हर दर्द को चुपचाप इबादत समझा, इसलिए अश्क... भी हर बार बहाए न गए। #अशोक_मसरूफ़ PIC Credit-gemini
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नहीं थे हमसफर उनकी राहों में वफा ए इश्क उसको ही पुकारा है पढ़ लेते रिश्ते जो खून से लिखे होते कहीं है नहीं एहसास हमें फिर भी अपने को सँवारा है #जवाहर_लाल_प्रजापति
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एक तरफ़ा इश्क़… तुम्हें चाहना मेरे लिए कोई फ़ैसला नहीं था, ये तो बस धीरे-धीरे मेरी हर धड़कन की आदत बन गया। तुम्हारी दुनिया में शायद मेरा कोई ज़िक्र न हो, मग़र मेरी हर याद तुम्हारे नाम से शुरू होती रही। मैंने कभी तुम्हें रोकने की ख़्वाहिश नहीं की, क्योंकि उड़ते परिंदों को मुट्ठियों में नहीं, दुआओँ में रखा जाता है। कुछ रिश्ते मंज़िल तक नहीं पहुँचते, लेकिन रास्ते भर दिल का हाथ थामे रहते हैं। आज भी जब ख़ुद से मिलता हूँ, तुम्हारा एक हिस्सा अपने भीतर ज़िंदा पाता हूँ। 🤍 #अशोक_मसरूफ़ PIC Credit-pinterest
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Have some fun 😊 मैंने ऑनलाइन एक किताब मंगाई "आलस कैसे छोड़ें?" किताब आ गई... तीन दिन से पैकिंग ही नहीं खोली, आलस जो आ गया। 😂 #अशोक_मसरूफ़
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हम जब तुम और मैं थे - हम जब तुम और मैं थे, तब हर सुबह किसी ख़त की तरह धीरे-धीरे खुलती थी, जिसका पहला लफ़्ज़ तुम हुआ करती थीं। मैं दिन भर की बातें शाम के लिए बचाकर रखता, और तुम एक मुस्कान में सारा हिसाब बराबर कर देती थीं। न जाने क्यों उस दौर में वक़्त भी हमारा हमसफ़र लगता था। घंटे पल बन जाते, और पल उम्र भर की याद। शायद इश्क़ का सबसे सच्चा रंग वही था... जब ज़िंदगी से पहले एक-दूसरे की फ़िक्र होती थी। #अशोक_मसरूफ़ PIC Credit-ChatGpt
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तेरे इश्क से रोशन मै यह धरती अंबर कर दूं चांद की उम्र चुरा कर मै अपनी प्रीत अमर कर दूं।। #lovepoetry #hindipoetry #writesbylalit
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सहारा लेकर तैरने वाले, हमारी नाव डुबाने की बात कर रहे है !
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तजुर्बा उम्र से नही, धोके और ख़राब वक़्त से मिलता है...
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ख़ुद को मत खोना, किसी को पाने के लिए...
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दिल जैसा साफ रखा है, न किसी से बैर रखा है, कर्म पर विश्वास और भगवान पर ऐतबार रखा है। दुनिया चाहे कुछ भी सोचे हमारे बारे में, हमने हर मुश्किल में बस भगवान का साथ रखा है। 🙏 जय श्री कृष्णा 🙏
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जय सेठ सवारियां 🙏 मंगला आरती की दर्शन ❣️
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*प्रेरित करने वाली बातों को न केवल सुने, बल्कि उन्हें अपनी सोच का भाग भी बनाएँ...!!* *जिस दिन हमने अपने जीवन को खुलकर जी लिया, वही दिन हमारा। अन्यथा बाकी तो सब कैलेंडर की तिथियाँ हैं...!!* *॥ जय श्री कृष्ण ॥* *🙏सुप्रभात 🙏*
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अरे लाड़ली..!😍 मै गले लगने के बहाने, गले पड़ जाऊंगी यही सोच के दूर रखती है 😋 और मेरा नाम सुनके जीजा को तो कमरे में बन्द कर देती है 😜😁😁
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जीजी जी 🤣🤣 को चरण स्पर्श के बदले गले मिल लो गुड मॉर्निंग में ......मॉर्निंग गुड ही हो जाएगी 😂😂
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🌺🌷🌺 🌱🥀कहें खुदा की मर्जी या तुमारी चाहत का असर🍃 🌱🥀अब तो दिल भी धड़कता है तुमारी रजा देख कर..🍃
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कीमती चीजें मुझे बहुत पसंद हैं , इसका सबसे बड़ा सुबूत तुम हो ।।💞
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इश्क़ का रोग छुपाना कितना मुश्किल है टूट कर भी मुस्कुरूना कितना मुश्किल है किसी के साथ दूर तक जाकर तो देखिए अकेले लौट कर आना कितना मुश्किल है
इश्क़ का #रोग बड़ा निराला है ,, हकीम भी परेशान,मरीज़ भी खुश और दवा भी बेअसर! जी हाँ दोस्तों आज का शब्द #रोग है #Song #Shayri #Gazal तो कीजिये अपनी पसंद का इज़हार #चित्रपट 🎧 #गीतमाला
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हे प्रभु ये क्या देखना पड़ रहा है,वैसे कुछ तो मजबूरी रही होगी,😂😂
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ज़िन्दगी में ये हुनर भी लाज़मी आना चाहिए दुश्मन सामनें अपने हों तो जंग हार जाना चाहिए
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#अमीर_मीनाई ♥ #शायरी फिर बैठे-बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लिया फिर उठ खड़ा हुआ वही #रोग इंतिज़ार का। #गीतमाला #Rekhta
इश्क़ का #रोग बड़ा निराला है ,, हकीम भी परेशान,मरीज़ भी खुश और दवा भी बेअसर! जी हाँ दोस्तों आज का शब्द #रोग है #Song #Shayri #Gazal तो कीजिये अपनी पसंद का इज़हार #चित्रपट 🎧 #गीतमाला
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