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If you haven’t practiced pranayama before, you are missing the essence of relaxation and mindfulness. So, start your yoga journey with this.
ध्यान रहे.... सूर्य के लिए
कूष्माण्डा माता मंदिर, दुर्गाकुंड वाराणसी
माता कूष्माण्डा का स्थान सूर्य के केंद्र में है
.. अगर सूर्य बलवान है तो..
आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति.. नेतृत्व क्षमता (Leadership).. सरकारी नौकरी और करियर में उन्नति.. साथ ही अच्छी ऊर्जा और स्वास्थ्य..
माता रानी का ध्यान, स्तुति, स्त्रोत और प्रार्थना (pdf में) ये सब टेलीग्राम चैनल पर भेज रही (लिंक इन बायो )
कर्क चतुर्थी (करवा चौथ) व्रत की अनंत शुभकामनाएं
अब बात संदर्भ की, सबसे पहली बात हमेशा हमीं लोगों से संदर्भ क्यों माना जाता है.. चाहे होली हो दीपावली या श्री रामनवमी का त्यौहार.. पूरी दुनिया को पता है कि हमारे त्यौहार चंद्रमा सूर्य गुरु और ग्रहों नक्षत्रों के ऊपर बने हैं.. फिर भी उसके बाद भी हर समय हमीं लोगों को क्यूँ प्रमाण देना पड़ता है या साक्ष्य देना पड़ता है.. हमारे त्यौहार हमारी आस्था हमारी श्रद्धा... हम मनाएंगे..
अब बात हो ही गई है तो बता देना.. पुस्तक खरीदना और पढ़ लेना
कर्क चतुर्थी यानि करवा चौथ के बारे में
१_ व्रतुत्स्व चंद्रिका
२_ नारद पुराण
और हां आजकल जो फैशन चल पड़ा है कि पुरुष भी रखना शुरू कर दिए हैं ये व्रत (फिल्मी स्टाइल में) तो इस व्रत का अधिकार स्त्री को ही है..
शिव परिवार और करवा माता रक्षा करें
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Sharad Purnima-Full moon day tonight!
आज रात्रि जागरण कर लेना
शरद पूर्णिमा वह रात जब चंद्रमा अपनी कलाओं से पूर्ण होता है.. इसे कोजागरी कहते हैं कोजागृति अर्थात कौन जाग रहा है???
आज पावन रात्रि को माता लक्ष्मी आशीर्वाद देने पृथ्वी पर आती है.. मान्यता है कि कोजागरी पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती है और जाग कर भक्ति करने वाले भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती है... आज रात्रि स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके….माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना
घी का दीपक जलाएं और खीर का भोग लगाएं (यह तो करना ही है) माता लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें और
श्री लक्ष्मी नारायण स्तुति करें..
आर्थिक उन्नति, सद्बुद्धि और परिवार की समृद्धि का संकल्प लें...
साथ ही जो खीर बनाई है पतले कपड़े से ढक कर रात को चंद्रमा की रौशनी में छोड़ दे और सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करें...
और हां, लक्ष्मी नारायण स्तुति दे रही जरूर से पढ़ लेना.. (टेलीग्राम चैनल पर link in bio) यह स्तुति स्कन्द पुराण के ब्रह्म खण्ड से है...
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इसलिए मन को बाहर की व्यर्थ दौड़ से समेटकर भीतर की ओर मोड़िए, जब अंतरात्मा शांत होती है, तब प्रभु की उपस्थिति का साक्षात अनुभव स्वयं होने लगता है।
@BahuRaani
आज रात्रि जागरण कर लेना
शरद पूर्णिमा वह रात जब चंद्रमा अपनी कलाओं से पूर्ण होता है.. इसे कोजागरी कहते हैं कोजागृति अर्थात कौन जाग रहा है???
आज पावन रात्रि को माता लक्ष्मी आशीर्वाद देने पृथ्वी पर आती है.. मान्यता है कि कोजागरी पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती है और जाग कर भक्ति करने वाले भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती है... आज रात्रि स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके….माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना
घी का दीपक जलाएं और खीर का भोग लगाएं (यह तो करना ही है) माता लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें और
श्री लक्ष्मी नारायण स्तुति करें..
आर्थिक उन्नति, सद्बुद्धि और परिवार की समृद्धि का संकल्प लें...
साथ ही जो खीर बनाई है पतले कपड़े से ढक कर रात को चंद्रमा की रौशनी में छोड़ दे और सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करें...
और हां, लक्ष्मी नारायण स्तुति दे रही जरूर से पढ़ लेना.. (टेलीग्राम चैनल पर link in bio) यह स्तुति स्कन्द पुराण के ब्रह्म खण्ड से है...
एक बात बता रही.. ध्यान देना...
घर में जो आपने गीता राखी है न... घर में लाल कपड़े में लपेट के ज़रा उसे बाहर निकाल लो, उसकोंसाफ करोऔर पढ़ाओ उसको अपने बच्चों को.... संस्कार का मतलब ये नहीं की तुम अपने बच्चों को बोलोगे की आज हम फ्री है तो बैठो, मैं तुम्हें आज संस्कार देने वाला हूँ.. ऐसे संस्कार नहीं दिए जाते, जो गलती तुम्हारे माँ बाप ने करी ना, वो गलती तुम मत कर देना..
ठीक है, वो भगवद्गीता पढ़ो उसमें जो लिखा है उसको अपने जीवन में उतारो और जियो वैसा जीवन जैसा कहा गया उसमें जीवन जीने के लिए तुम्हे लगता है की तुम पचास के ऊपर हो गये या साठ साल की उम्र में भगवत गीता पढोगे जब तुम रिटायर हो जाओगे तब क्या करोगे भगवत गीता पढ़ के और तब क्या करोगे तुम ये जान के की जीवन कैसे जिया जाता है जब तुमने आधा जीवन तो जी लिया .. तब तुम्हे मालूम चलेगा की जीवन कैसे जीना है चलो मालूम चल भी गया तुमको की जीवन कैसे जीना है तो पछतावे के अलावा तुम्हारे हाथ लगेगा क्या?
.. अपने बच्चों को बताओ की भगवद्गीता क्या होती है, उसे पढ़ाओ, उसमें जो लिखा है, उसको समझने की कोशिश करो..अब जब तुम समझने की कोशिश करोगे तो तुम समझोगे की जो भगवद्गीता जब तुम पढ़नी शुरू करोगे ना, तो तुम धृतराष्ट्र की तरह पढ़ोगे..धृतराष्ट्र यहाँ पे अंधे है और अंधापन अज्ञानता का प्रतीक है..बार बार बार बार पढ़ने से तुम ये समझ में आ जाएगा की हाँ, मैं अंधा हूँ, मैं अज्ञानी हूँ, मैं धृतराष्ट्र हूँ, लेकिन और बार बार पढ़ने से तुम्हारा अज्ञानता दूर होगी और तुम अर्जुन की तरह हो जाओगे, जो जानता है की मैं अज्ञानी हूँ,... लेकिन मुझे ज्ञान पाना है, जिज्ञासा होगी तुम्हारे अंदर, और उस वक्त जब तुम भगवत गीता सुनोगे तो कृष्ण जो अर्जुन से कह रहे होंगे, एक समय आयेगा.. जब वो तुम्हें लगेगा, कृष्ण तुमसे कह रहे हैं, तो जो भी भगवत गीता में कह रहे होंगे, तुम उसको अपने जीवन में उतारना अर्जुन की तरह..और तुम अर्जुन बन जाना.. और फिर एक समय और आयेगा.. जो अर्जुन बनते बनते बनते बनते बनते बनते कृष्ण की तरफ चलने चले जाओगे और धीरे धीरे करके वो कृष्ण ही हो जाए तो धृतराज से अर्जुन और अर्जुन से कृष्ण की ये यात्रा है भगवद्गीता और ये यात्रा उसी की शुरू होगी जो उस भगवद्गीता को खोलेगा...
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मुक्ति चक्र पूर्णता और ईश्वर के साथ मिलन का प्रतीक है, इसलिए इनका आदर करने से अहंकार का नाश होता है,आंतरिक स्वतंत्रता प्राप्त होती है और अस्तित्व के शाश्वत सत्य का आभास होता है
सिद्धिदात्री में सिद्धि का अर्थ है अलौकिक शक्ति या ध्यान क्षमता,और धात्री का अर्थ है देने वाली
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नवरात्रि दुर्गा पूजा और दशहरा की अनंत शुभकामनाएं सभी को... एक बात बता रही.. उसमें ध्यान रखना चाहे नवरात्र हो, या जब कभी भी कुलदेवी के मंदिर जाना हो ना तो उससे एक दिन पहले ..एक नारियल लेके अपने घर में आओ... (पानी वाला) उसको अपने बच्चों के ऊपर से उतारो, अपने घर में सब के ऊपर से उतारो, पूरे घर में उतारो और शाम को दियाबत्ती करके अपने मंदिर के स्थान पे रख दो..
और सुबह जब तुम निकलोगे दर्शन करने को... तो उस नारियल को भी साथ में लेके निकलो... जब तुम अपनी कुलदेवी या कुलदेवता पे जा रहे हो या किसी भी सिद्धिपीठ या शक्तिपीठ में जा रहे हो तो उसको अपने साथ लेके जाओ और मन में ये भाव लेके जाओ या अपने घर की सारी बलाएं देवी माँ मैं तेरी चरणों में समर्पित करने जा रही हूँ और छोड़ आना उसको वहीं और वहाँ से जो प्रसाद के तौर पे तुमको मिलेगा उसको लेके आना अपने घर पे आना.. अगर श्रीफल मिले तो मंदिर में रख देना... नारियल मिले तो उसका पानी छिड़कना पूरे घर में और अगर प्रसाद मिले तो सब पे बाँटना.. और एक चीज़ का और ध्यान रखना जो की मैं नोटिस कर रही हूँ, जो हो ही नहीं रहा है... जिस तरीके से होना चाहिए.. जब कहीं पे भी कोई शक्ति पीठ या सिद्ध पीठ होगा, उसके आस पास भैरव का मंदिर जरूर होगा, वहां का दर्शन जरूर से करना... मंदिर में गए तो थोड़ा समय बिताना, धूप जलाना, नाम की ध्यान करना वहाँ पे अगर ध्यान करने का व्यवस्था नहीं है, वहाँ पे तुम्हे नहीं लग रहा है तो वहां पर सेवा करना,... मतलब कुछ ऐसा करना जिसकी वजह से बाकी लोगों को सहूलियत हो जाए... एक पॉइंट दिमाग में रखना की कम से कम एक घड़ी का समय (२४ मिनट) मुझे भैरव के मंदिर में बिताना है, चाहे वो कैसे भी बिताओ, सबसे अच्छा होगा, आंख बंद करके बिताओ, नहीं मौका लग रहा, सेवा करके बिता दो..पानी पिला दो, सफाई कर दो..किसी की मदद कर दो.. यह तरीका है.. फिर घर आना..
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स्वर्णवर्णामज्ञाचक्रस्थितं षष्ठदुर्गं त्रिनेत्राम्।
वरभितकरं सगपधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
देवी दुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है वे हमारे शरीर के आज्ञा चक्र (तृतीय नेत्रचक्र) का संचालन और प्रतिनिधित्व करती हैं वे अंतर्ज्ञान,बुद्धि,आध्यात्मिक जागरूकता और दूरदर्शिता का प्रतीक हैं..
आज माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा है.…अगर संभव हो तो.. मां दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लेना..घर में यह पुस्तक जरूर से रखो...
एक बात बता रही...ध्यान रखना..
दुर्गा सप्तशती का प्रत्येक अध्याय अपने आप में पूर्ण है
हम भले ही अलग-अलग अध्यायों को अलग-अलग संकल्पों से जोड़ते हैं, किंतु सबसे बड़ा आशीर्वाद श्रद्धा, भक्ति और सच्चे समर्पण से दिव्य माँ के प्रति प्राप्त होता है..
जो लोग पहली बार पढ़ना प्रारम्भ कर रहे हैं….मतलब माँ दुर्गा की कृपा के अंतर्गत नई आध्यात्मिक यात्रा शुरू कर रहे हैं.... तो यहां पर प्रत्येक अध्याय का पाठ करने का फल दे रही...
अध्याय १: मधु और कैटभ वध
भय और नकारात्मकता से सुरक्षा
अचानक आने वाली चुनौतियों के दौरान दैवीय संरक्षण
भ्रम और मानसिक अशांति को दूर करना
अध्याय २: महिषासुर की सेना का वध
कठिन परिस्थितियों में साहस
आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का विकास
विरोधियों, शत्रुओं और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा
जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए निर्भय बने रहना
अध्याय ३: महिषासुर वध
बाधाओं पर विजय
कानूनी मामलों और अदालती मुकदमों में शक्ति
छिपे हुए विरोध और आपके विरुद्ध काम करने वाले लोगों से सुरक्षा
अहंकार, भय और आत्म-संदेह पर विजय पाना
अध्याय ४: शक्रादि स्तुति... इंद्र और देवताओं द्वारा देवी स्तुति
माँ दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करना
शांति और समृद्धि
उपयुक्त विवाह-संबंध की कामना और रिश्तों में सामंजस्य के लिए प्रार्थना
अध्याय ५: देवी-दूत संवाद
ठहरी हुई ऊर्जा को दूर करना
गहरी जड़ें जमा चुकी बाधाओं को हटाना
करियर, वित्त और व्यक्तिगत विकास में प्रगति
हृदय से की गई मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना
अध्याय ६: धूम्रलोचन वध
आध्यात्मिक सुरक्षा को मजबूत करना
भक्ति के माध्यम से एक सुरक्षात्मक आभा विकसित करना
नकारात्मकता और शत्रुतापूर्ण प्रभावों से सुरक्षा
साहस और निर्भयता विकसित करना
अध्याय ७: चण्ड-मुण्ड वध
तीव्र नकारात्मक प्रभावों से आध्यात्मिक सुरक्षा
छल-कपट और अस्वस्थ भावनात्मक नियंत्रण से मुक्ति
निरंतर भय और ऊर्जात्मक भारीपन को दूर करना
माँ काली के उग्र रक्षक स्वरूप का आवाहन
अध्याय ८: रक्तबीज वध
परिवार में शांति की पुनः स्थापना
बिगड़े हुए रिश्तों का सुधार
चल रहे संघर्षों और कानूनी विवादों के दौरान शक्ति
सद्भाव, भावनात्मक उपचार और कल्याण की प्रार्थना
अध्याय ९: निशुम्भ वध
लंबी बीमारी के दौरान स्वास्थ्य और स्वस्थ होने की प्रार्थना
अपने प्रियजनों की देखभाल करते समय शक्ति पाना
परिवार शुरू करने से जुड़ी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना
दुःख, भावनात्मक पीड़ा और गहरे भीतरी घावों का उपचार
अध्याय १०: शुम्भ वध
आर्थिक स्थिरता और समृद्धि
कर्ज़ और आर्थिक बोझ से मुक्ति
रुके हुए या अटके हुए धन की वापसी की प्रार्थना
लोभ और आसक्ति की भीतरी प्रवृत्तियों को दूर करना
अध्याय ११: नारायणी स्तुति
धन और समृद्धि
सुख-सुविधा, सद्भाव और समग्र कल्याण
व्यावसायिक पहचान और सफलता
जीवन के हर क्षेत्र में दिव्य माँ का आशीर्वाद प्राप्त करना
अध्याय १२: फलश्रुति
दुर्भाग्य से रक्षा
भय और परेशान करने वाले विचारों से राहत
घर में शांति
कठिन समय में शक्ति, आशा और विश्वास
अध्याय १३: सुरथ-वैश्य-वर-प्रदानम्
जीवन की बड़ी सफलताएँ
आध्यात्मिक जागृति
भावनात्मक घावों का उपचार
जीवन का उद्देश्य, ज्ञान और दिव्य मार्गदर्शन पाना
माँ दुर्गा के प्रति पूर्ण समर्पण..
जय मां
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चंद्रघंटा का अर्थ है जिसका सिर घंटी के आकार का अर्धचंद्र है उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है वे राक्षसों के विरुद्ध युद्ध के लिए हमेशा तत्पर रहती है
उन्हें चंद्रखंड,चंडिका या रणचंडी भी कहते है वह अपनी कृपा से भक्तों के पाप,कष्ट,शारीरिक पीड़ा,और प्रेतवाधित बाधाएं दूर करती हैं।





















