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📍 रीवा, मध्य प्रदेश | UGC Rollback की मांग तेज
मध्य प्रदेश के रीवा में UGC के विरोध में सवर्ण समाज के युवाओं ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर विशाल पैदल मार्च निकाला। 🔥
हाथों में विरोध के स्वर और जुबां पर UGC Rollback की मांग लेकर युवाओं ने पूरे शहर में पैदल मार्च किया। यह प्रदर्शन कलेक्ट्रेट पहुंचकर समाप्त हुआ।
युवाओं की इस एकजुटता ने साफ कर दिया है कि UGC के प्रावधानों को लेकर विरोध की आवाज लगातार उठ रही है।
अब सवाल है—युवाओं की इस आवाज पर सरकार क्या कदम उठाती है?
#Rewa #UGCRollback #मध्यप्रदेश #सवर्णसमाज #UGC
Ashutosh Sharma retweeted
एक बार इस लड़के की कहानी भी सुन लीजिए
इनका नाम सूरज तिवारी है और ये अमेठी के रहने वाले हैं। सूरज जी ऑटो चलाकर अपने परिवार का सहारा बनते हैं और साथ ही अपनी पढ़ाई एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं।
घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, संसाधनों की कमी है, संघर्ष बहुत है, लेकिन इसके बावजूद इन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया है।
सवाल यह है कि क्या किसी गरीब सामान्य वर्ग के विद्यार्थी को आर्थिक तंगी के कारण अपने सपने छोड़ देने चाहिए?
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक शिक्षा और अवसर पहुँचाना होना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के ऐसे विद्यार्थियों को भी बेहतर शिक्षा, छात्रवृत्ति और उचित सहायता मिलनी चाहिए, ताकि गरीबी उनकी प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने।
और एक बात समझ से परे है…
जब कोई सामान्य वर्ग का गरीब युवा दिन-रात मेहनत करके, तमाम मुश्किलों को पार करके किसी बड़े पद पर पहुँचता है, तो कुछ लोग सवाल उठाने लगते हैं कि हर जगह यही लोग क्यों दिखाई देते हैं?
लेकिन कोई यह क्यों नहीं पूछता कि उस मुकाम तक पहुँचने के लिए उसने कितनी रातें जागकर गुजारी होंगी, कितनी परेशानियों से लड़ा होगा और कितने संघर्ष किए होंगे?
आरक्षण और सामाजिक न्याय पर बहस अपनी जगह है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली युवाओं की मदद भी उतनी ही जरूरी है।
जाति कोई भी हो, गरीबी से लड़ रहे हर मेहनती विद्यार्थी को सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
सूरज तिवारी जी, आपकी मेहनत को सलाम है।
आपका संघर्ष एक दिन आपकी सफलता की कहानी बने, यही कामना है।
मेहनत करने वाले हर युवा को उसका हक और सम्मान मिलना चाहिए।
एक बार इस लड़के की कहानी भी सुन लीजिए
इनका नाम सूरज तिवारी है और ये अमेठी के रहने वाले हैं। सूरज जी ऑटो चलाकर अपने परिवार का सहारा बनते हैं और साथ ही अपनी पढ़ाई एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं।
घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, संसाधनों की कमी है, संघर्ष बहुत है, लेकिन इसके बावजूद इन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया है।
सवाल यह है कि क्या किसी गरीब सामान्य वर्ग के विद्यार्थी को आर्थिक तंगी के कारण अपने सपने छोड़ देने चाहिए?
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक शिक्षा और अवसर पहुँचाना होना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के ऐसे विद्यार्थियों को भी बेहतर शिक्षा, छात्रवृत्ति और उचित सहायता मिलनी चाहिए, ताकि गरीबी उनकी प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने।
और एक बात समझ से परे है…
जब कोई सामान्य वर्ग का गरीब युवा दिन-रात मेहनत करके, तमाम मुश्किलों को पार करके किसी बड़े पद पर पहुँचता है, तो कुछ लोग सवाल उठाने लगते हैं कि हर जगह यही लोग क्यों दिखाई देते हैं?
लेकिन कोई यह क्यों नहीं पूछता कि उस मुकाम तक पहुँचने के लिए उसने कितनी रातें जागकर गुजारी होंगी, कितनी परेशानियों से लड़ा होगा और कितने संघर्ष किए होंगे?
आरक्षण और सामाजिक न्याय पर बहस अपनी जगह है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली युवाओं की मदद भी उतनी ही जरूरी है।
जाति कोई भी हो, गरीबी से लड़ रहे हर मेहनती विद्यार्थी को सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
सूरज तिवारी जी, आपकी मेहनत को सलाम है।
आपका संघर्ष एक दिन आपकी सफलता की कहानी बने, यही कामना है।
मेहनत करने वाले हर युवा को उसका हक और सम्मान मिलना चाहिए।
Ashutosh Sharma retweeted
माननीय पप्पू अहीर जी, बिहार में 14% अहीर है। अगर तुम सच में अंतरजातीय विवाह के पक्षधर हो, तो पहले अपने समाज से शुरुआत करो। PDA को मजबूत करो
अपनी बेटियों की शादी चमार, दुसाध और मुसहर समाज में करके मिसाल पेश करो। बदलाव की शुरुआत खुद से करो !
टोंटी भैया, अपने पार्टी के प्रवक्ता पर ईशनिंदा का कानून कब लागू करवाएँगे? वह बार-बार जानबूझकर सनातन धर्म को निशाना बनाता है, लेकिन आप हर बार उसे माफ कर देते हैं।
वहीं दूसरी तरफ अगर कोई व्यक्ति विनोद या मजाक कर दे, तो उसके कार्यक्रम रुकवाने और कभी माफ़ ना करने की बात करते है।
इसे तो दोगलापन कहते हैं!
मानवीय भूलों के लिए तो क्षमा किया जा सकता है, ‘ईशनिंदा’ के लिए कभी नहीं। ऐसे दुष्मुखी लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगाना ही समाज के लिए श्रेयस्कर है। पूरे देश में इनके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं, नई अनुमति नहीं दी जाए और सार्वजनिक जीवन में हर सच्चा सनातनी इनका पूर्ण बहिष्कार करे, यही इनके अक्षम्य पाप का दंड होना चाहिए, नहीं तो वो भी ईशनिंदा के पाप का भागी बनकर अपना लोक-परलोक बिगाड़ लेगा।
अगर दुर्भावना से भरा ऐसा व्यक्ति जीवन भर भी एकांतवास करके अपने किये का पश्चाताप और प्रायश्चित करेगा तो भी कोई भी धर्म प्रधान आस्थावान उसे माफ़ नहीं करेगा। मनुष्य का दंभ इतना भी नहीं होना चाहिए कि वो अपने को ईश्वर से ऊपर समझने लगे।
वैधानिक कार्रवाई हो।
माननीय पप्पू अहीर जी, बिहार में 14% अहीर है। अगर तुम सच में अंतरजातीय विवाह के पक्षधर हो, तो पहले अपने समाज से शुरुआत करो। PDA को मजबूत करो
अपनी बेटियों की शादी चमार, दुसाध और मुसहर समाज में करके मिसाल पेश करो। बदलाव की शुरुआत खुद से करो !
तेहसीन पूनावाला ने जयपुर डायलॉग्स समिट में SC/ST एक्ट के दुरुपयोग, जातिगत राजनीति और 78% आरक्षण जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए।
तेहसीन पूनावाला सही और जरूरी सवाल उठा रहे हैं। समाज को ऐसे निष्पक्ष और बेबाक लोगों की जरूरत है, जो पार्टी नहीं, मुद्दों के आधार पर बात करें। अफसोस ऐसे लोग आज कम होते जा रहे है!
पटना की सड़कों पर ब्राह्मण समाज का हुंकार
ब्राह्मण कल्याण बोर्ड, सवर्ण आयोग, EWS में समान अवसर, UGC रोलबैक और आरक्षण समीक्षा समेत 15 मांगों को लेकर निकली मौन संकल्प पदयात्रा।
80 साल में पहली बार सवर्ण समाज अपने अधिकारो के लिए सजग हो रहा है, जब अधिकारों की आवाज़ उठेगी, तभी बदलाव आएगा!
#Patna #Bihar #BrahminSamaj
दिल दहला देने वाला वीडियो!
पंचकूला में तीसरी कक्षा के छात्र ने KG की मासूम बच्ची को पत्थर और गमले से पीटा, बच्ची PGI रेफर।
इतनी छोटी उम्र में ऐसी हिंसा बेहद चिंताजनक है।
अपने बच्चों का ख्याल रखें, उन्हें स्कूल भेजकर निश्चिंत न हो जाएँ। जब स्कूल में भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो आखिर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
80 साल में पहली बार सवर्ण समाज ने किसी कानून का विरोध किया है, वो भी तब जब पानी सिर से ऊपर चला गया है!
#UGC_Rollback
भाजपा ने टिकट काटा, जनता ने हिसाब बराबर कर दिया!
पटना MLC सीट पर 30 साल का इतिहास बदल गया। जीत हुई डॉ. संजीव की, जिन्होंने बिहार विधानसभा में 65% आरक्षण का विरोध किया था।
जिसे पार्टी ने नकारा, उसे जनता ने स्वीकारा!
ये सिर्फ एक चुनावी हार-जीत नहीं, बदलते राजनीतिक मिज़ाज का संकेत है।
मोदी जी फिलहाल ये शुरुआत है, आगे का खेल देखिएगा !
अंबेडकर भक्त मोदी जी ने इतने बड़े-बड़े काम किए हैं कि अब भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने से कोई रोक नहीं पाएगा।
मोदी ने बाबासाहेब आंबेडकर के पाँच तीर्थस्थल बनवा दिए इतनी बड़ी उपलब्धि सायद ही कोई प्रधानमंत्री कभी हासिल कर पाएगा
अब मोदी का नाम नीले अक्षरों से लिखा जाएगा 💙
शेर अब आदमखोर हो चुका है, जो उसे राजा बनाकर सिंहासन तक लाए थे, आज वही उसका शिकार बन रहे हैं।
अब सिंहासन पर चाहे सूअर बैठे या गीदड़, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…
जब मुख्यमंत्री ही SC/ST एक्ट का दुरुपयोग कर सकता है, तो सोचिए आम जनता किस हद तक इसका दुरुपयोग कर रही होगी!
एक देश में दो कानून कब तक चलेंगे? संविधान सबको समान न्याय का अधिकार देता है, फिर कानून के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए समान और सख्त नियम क्यों नहीं?
#SCSTAct








