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Chārans have significantly contributed to the historical narratives of Rajasthan and Gujarat, playing diverse roles. This serves as a concise overview, and I plan to delve deeper into these topics in future threads. Source citations will be provided in the concluding tweet.
100%
India should be more like Israel.
Anyone who has a detailed map of Sorath during Akbar's Reign?
@Advitro_Ayar @TheSaffronArmy @GujaratHistory
Do tag people who may have this.
Deviputrā retweeted
The vagher rebellion in Okha was whole heartedly supported by Charans as well.
The gazetteer of Gujrat has also mentioned Charans as active participants in the disturbances.
Below is the hero stone of Tumbel Charan Naagshi who accompanied Mulu Manek.
Deviputrā retweeted
Whole point of League katiyu varan is that these tribes are small yet martially impactfull in west india.
They are Reason why saurastra was free & peaceful for most of mediveals.
& All are High Zagro
Deviputrā retweeted
आज धूड़ देखी, कलाम एकेडमी ने घणा लखदाद... एक्टिंग घणी बढ़िया ही। सब देखजो...
#dhood
The vagher rebellion in Okha was whole heartedly supported by Charans as well.
The gazetteer of Gujrat has also mentioned Charans as active participants in the disturbances.
Below is the hero stone of Tumbel Charan Naagshi who accompanied Mulu Manek.
Deviputrā retweeted
Charans with all their literary heritage of history writing including historians like Kishore Singh,kishan singh, Ramnathji, Shyamaldas ji, Dayaldas ji etc, don't have a single book which can tell about the contribution of charan heroes in the history of western India.
Deviputrā retweeted
My favourite 'what if' is a separate nation of Rajasthan and Gujarat.
With some part of malwa of course.
ब्रज वालों ने अपने रोने धोने का कार्यक्रम कब का रखा है।
अब खुलेगा राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का परमानेंट विभाग, छात्र नेता शुभम रेवाड़ के लंबे संघर्ष की हुई जीत।
जयपुर। राजस्थान के युवाओं, मातृभाषा प्रेमियों और छात्र शक्ति के लिए आज एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण दिन है। राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) में आखिरकार राजस्थानी भाषा का परमानेंट (नियमित) विभाग खोलने का रास्ता साफ हो गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही पूरे प्रदेश के छात्रों और मायड़ भाषा के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसे राजस्थान की माटी और छात्र नेता शुभम रेवाड़ के एक लंबे व अथक संघर्ष की सबसे बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है पूरी घोषणा:
लंबे समय से की जा रही मांग को स्वीकार करते हुए आखिरकार राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का एक पूर्ण और स्वतंत्र नियमित विभाग (Permanent Department) स्थापित करने की घोषणा की गई है। इस घोषणा के तहत अब छात्र अपनी मातृभाषा में नियमित रूप से डिप्लोमा, डिग्री और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) जैसे उच्च स्तरीय कोर्स कर सकेंगे। अब तक विश्वविद्यालय में विदेशी भाषाओं के नियमित विभाग तो चल रहे थे, लेकिन राजस्थान की अपनी भाषा को यह सम्मान हासिल नहीं था, जो कि शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में लड़ गए आंदोलन के बाद अब मुमकिन हो पाया है।
शुभम रेवाड़ का लंबा संघर्ष और दर्जनों धरने:
इस ऐतिहासिक मांग को हकीकत में बदलने के पीछे छात्र नेता शुभम रेवाड़ और उनके साथियों का एक लंबा और कड़ा संघर्ष रहा है। शुभम रेवाड़ पिछले लंबे समय से राजस्थानी भाषा को उसका हक दिलाने और प्रदेश में छात्रसंघ चुनावों को बहाल कराने की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहे हैं। प्रशासन और सरकार के कानों तक छात्रों की आवाज पहुंचाने के लिए उन्होंने पूर्व में दर्जनों धरने दिए, रैलियां निकालीं और हर स्तर पर शांतिपूर्ण लड़ाइयां लड़ीं।
14 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल:
इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ हाल ही में देखने को मिला, जब शुभम रेवाड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन (भूख हड़ताल) शुरू कर दिया था। यह भूख हड़ताल पूरे 14 दिनों तक चली, जिसने पूरे प्रदेश के छात्र आंदोलन और सियासत में हलचल मचा दी थी। बिना अन्न-जल ग्रहण किए बैठने के कारण शुभम की तबीयत बेहद नाजुक हो गई थी और किडनी फेल होने का खतरा मंडराने लगा था। पुलिस प्रशासन ने उन्हें जबरन धरना स्थल से उठाकर सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के आईसीयू में भी भर्ती कराया था, लेकिन अस्पताल के बेड से भी शुभम ने अपनी जिद नहीं छोड़ी और अनशन जारी रखा। आख़िरकार इस भीषण और अडिग संघर्ष के आगे प्रशासन को झुकना ही पड़ा।
यह जीत केवल एक विभाग के खुलने की नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के करोड़ों लोगों की अस्मिता, उनकी मातृभाषा के सम्मान और छात्र शक्ति के एकजुट संकल्प की जीत है। छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने इस घोषणा पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे मायड़ भाषा के सम्मान और छात्र समुदाय के संघर्ष की एक बड़ी ऐतिहासिक जीत बताया है।
J for Jains. J for jews.
(Just kidding)

























