
Working with @SAILsteel, Youtuber, भाषाप्रेमी, शब्द व्युत्पत्ति में विशेष रुचि, पुस्तक अनुवादक
Noida/Jaipur
Joined September 2010
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जन स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली मेट्रो में यह विज्ञापन चस्पां करवाया है। कितना अच्छा होता यदि भाषा की सेहत का भी ध्यान रखा गया होता!
आन्त्रशोध – गलत, आन्त्रशोथ – सही क्योंकि शोध = शुद्ध करना और शोथ = सूजन तो आँतों की सूजन = आन्त्रशोथ
शेष चित्र में...
' ॐ जय अम्बे गौरी' भारत के घर-घर में गाई जाने वाली आरती है। इस विडियो में प्रस्तुत है आरती का शाब्दिक अर्थ।
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आप रुपया लिखते हैं या रूपया? रुपए लिखते हैं या रुपये? मेरा यह विडियो देखिए, न केवल इस शब्द के बारे में, बल्कि ऐसे ही दूसरे कुछ शब्दों को लिखते हुए भी कभी सोचना नहीं पड़ेगा। विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण।
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क्या फॉर्म पर age के लिए 'आयु' लिखना सही है? आयु, उम्र और वय में क्या अंतर है; जानने के लिए देखें मेरा यह विडियो।
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अंतरराष्ट्रीय सही है या अंतर्राष्ट्रीय? अगर यह उलझन आपको भी होती है तो यह विडियो आपके लिए है।
youtube.com/shorts/DxhqzQLfo…
कल शाम जब घर की लिफ़्ट में घुसी तो एक लड़की पहले ही अपना कुत्ता लिए खड़ी थी लड़की ने तो मोबाइल से मुँह तक न उठाया पर कुत्ते ने कई बार मुझे पलटकर देखा, शायद एक ही बिल्डिंग में रहने के कारण पहचान गया था
इंसानों के बीच रह-रहकर ये आजकल के कुत्ते भी कुछ ज़्यादा ही ह्यूमन नहीं हो गए?
विडियो अलर्ट :
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा
हनुमान चालीसा पढ़ते हुए जब ये पंक्तियाँ आती हैं तो बाकी नाम तो समझ में आते हैं पर ये ‘सनकादिक’ आखिर कौन हैं? चलिए, जानते हैं इस विडियो में।
youtu.be/YpwqTjoxCjM
#हनुमानचालीसा
यह सच है कि सिर्फ़ किताबी ज्ञान से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन यह भी सच है कि अगर आप किताबें पढ़ते हैं तो आपके जीवन में कुछ करिश्माई घटने की संभावना प्रबल हो जाती है क्योंकि किताबें आपको वह कसौटी प्रदान करती हैं जिस पर आप अपने जीने के अंदाज़ को लगातार परख सकते हैं।
#पुस्तक_दिवस
‘‘हे धरती माँ! जो कुछ भी तुमसे लूंगा, वह उतना ही होगा जितना तू पुन: पैदा कर सके। तेरी जीवन शक्ति पर कभी आघात नहीं करूंगा।’’
(अथर्ववेद में हमारी शपथ)
#worldearthday2023
पहले हम स्मार्ट थे और समय बरबाद करने वाले टीवी को इडियट बॉक्स कहते थे, फिर हम इडियट हो गए और समय बरबाद करने वाले मोबाइल फोन को स्मार्टफोन कहने लगे।
बच्चों को सिखाएँ कि घर में कोई बड़ा खड़ा हो तो उसके लिए अपनी कुर्सी छोड़ दें।
खुद को समझाएँ कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कोई बच्चा खड़ा हो तो उसके लिए अपनी सीट छोड़ दें।
#आदि और #इत्यादि दोनों का ही प्रयोग 'वगैरह' के संदर्भ में होता है पर क्या दोनों में कोई अंतर है? जानने के लिए देखें मेरा यह विडियो।
लिंक : youtu.be/pwnD-Gxwj2Y
बचपन से पाई अधूरी शिक्षा...
"He who digs a pit for others falls in himself."
इस अनुभव से पूर्ण हुई...
"I helped a man climb a mountain and found that I too had reached the top."
बेटी की पीटीएम में पेरेंट्स को टीचर्स से 20-20 मिनट तक गहन चर्चा करते देखकर मुझे ठीक वैसी ही इनसिक्यॉरिटी होती है जैसी कॉलेज के दिनों में एग्ज़ामिनेशन हॉल में लड़कियों को 'मैडम, शीट; मैडम, शीट' चिल्लाते देखकर होती थी।
#पीटीएम
जो आउट ऑफ़ साइट होकर भी कभी आउट ऑफ़ माइंड न हों, बोलो कौन?
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बच्चे
सेंटी होने की कोई ज़रूरत नहीं। अभी आगे भी है।
जो आउट ऑफ़ साइट न होने पर आपको आउट ऑफ़ माइंड कर दें, बोलो कौन?
वही...
बच्चे
प्रैक्टिकल बात दूसरी वाली ही है। बाकी सब मोह-माया है।
समाचार वाचक हमेशा नमस्कार ही क्यों कहते हैं, नमस्ते क्यों नहीं? हम अपने से बड़ों को नमस्ते ही क्यों कहते हैं, नमस्कार क्यों नहीं? क्या इन दोनों शब्दों में कोई फर्क़ है? जानना चाहते हैं तो पोस्ट पढ़ें या विडियो देखें।
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