राहुल देव Rahul Dev retweeted
Coming Soon
Podcast with @RahulDev718370
नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ, कॉकरोज जनता पार्टी, देश की राजनीति, आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 सब पर खुलकर बोले वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव
इसमें सबसे दिलचस्प है 'योगी आदित्यनाथ और सनातन' की चर्चा।
youtube.com/@thereporterhind…
राहुल देव Rahul Dev retweeted
If Prasar Bharati can spend ₹15 crore a year on a DD News show featuring a star anchor, while the ISRO Chairman’s basic pay is about ₹27 lakh a year, shouldn’t we rethink our priorities? If India wants to conquer space and attract our finest scientific minds, our rewards must match our ambitions.
राहुल देव Rahul Dev retweeted
आर्काइव | गोलवलकर : जिसने देश को बांट दिया.
अपनी किताब 'नेशनहुड' में गोलवलकर बेहिचक हिंदू संस्कृति को फैलाने के प्रोजेक्ट की तुलना जमर्नी के यहूदी विरोध के साथ करते हैं. वे लिखते हैं, “नस्ल और संस्कृति को शुद्ध बनाए रखने के लिए जमर्नी ने यहूदियों का सफाया कर दुनिया को चौंका दिया.” “सर्वोत्तम रूप में नस्लीय गौरव वहां प्रकट हुआ. जमर्नी ने यह भी दिखाया है कि भिन्न भिन्न जड़ों वाली नस्लों और संस्कृतियों का एक हो जाना असंभव है. यह हिंदुस्तान के लिए एक अच्छा सबक है.”
गोलवलकर का जाति अत्याचारों का विश्लेषण आजकल के सोशल मीडिया के दक्षिणपंथी कमांडो के तर्कों से अलग नहीं हैं. उनका मानना था कि इस मुद्दे को बहुत अतिरंजित किया जा रहा है. उन्होंने लिखा, “पिछले कुछ सालों में अचानक, हिंदुओं द्वारा हरिजनों पर हमलों की रिपोर्ट समाचारपत्रों में दिखाई देने लगी हैं. “मुझे पक्का विश्वास है कि इस प्रकार की रिपोर्टिंग का उद्देश्य कुछ और ही है. कई बार तो खबर ही गलत होती है.” उन्होंने आगे कहा, “मुझे संदेह है कि यह कोई बाहरी साजिश है अन्यथा ऐसा कोई कारण नहीं है कि इस तरह के समाचारों को इतनी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाए.”
महिलाओं के बारे में उनका विचार था कि वे आधुनिकता के कारण गुमराह हो रही हैं. एक श्लोक का हवाला देते हुए वे कहते हैं कि “एक पवित्र महिला अपने देह को ढांकती है.” उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि “आधुनिक” महिलाएं मानती हैं कि “ज्यादा से ज्यादा लोगों के आगे अंगप्रदर्शन करना आधुनिकता है. कितनी गिरी हुई बात है.”
समानता की मांग उन्हें मजाकिया लगती थी. वे लिखते हैं, “अब महिलाओं के लिए समानता” और “पुरुष से स्वतंत्रता” का हल्ला मचाया जा रहा है.” अलग-अलग पदों पर लैंगिक आधार पर आरक्षण का दावा किया जा रहा है और इस प्रकार जातिवाद, सांप्रदायवाद, भाषावाद की सूची में एक और शब्द जुड़ गया है ‘सेक्सवाद’.”
संघ के भीतर गोलवलकर को जिस प्रकार के आभामंडल में रखा जाता है उसे भेद कर देखने से उनके ये वक्तव्य बीसवीं शताब्दी के शुरू में ऊपरी-मध्य-वर्ग के मराठी ब्राह्मण मर्द के टुच्चे पूर्वाग्रहों और कट्टरपंथी विचार लगते हैं. गोलवलकर ने अपने इन पूर्वाग्रहों को राष्ट्रवाद और फासीवाद की भाषाई चाशनी में लपेट कर पेश किया. डरावनी बात है कि हास्यास्पद से लगने वाले ये विचार आज भारतीय राजनीति और संस्कृति के शीर्ष पर विराजमान हैं.
पढ़ें गोलवलकर पर हरतोष सिंह बल का पूरा लेख: hindi.caravanmagazine.in/rep…
#RSS100Years #rss #golvalkar #rssnews #IndianPolitics #BJP #Savarkar #Gandhi
राहुल देव Rahul Dev retweeted
असंख्याः परदोषज्ञा गुणज्ञा अपि केचन।
स्वयमेव स्वदोषज्ञा विद्यन्ते यदि पञ्चषाः॥
दूसरों के दोष देखने वाले लोग अनगिनत हैं, वहीं - दूसरों के गुण पहचानने वाले लोग थोड़े ही हैं; पर अपने दोष स्वयं पहचानने वाले यदि पांच-छह लोग भी मिल जाएं तो बड़ी बात है। #शुभचंद्र #सुभाषितार्णव (275)
राहुल देव Rahul Dev retweeted
The SIR is a Scam!
Former CEC S.Y. Quraishi calls the ongoing Special Intensive Revision of electoral rolls “nothing less than a fiasco” and “a scam” driven by “complete bad intention.”
Speaking in a wide-ranging interview recorded for the London Vārta with me in London, Mr Quraishi said the exercise finds no mention in the Constitution, the Representation of the People Act, or the Registration of Electors Rules, 1960. “For the last 75 years, the Election Commission has been updating the electoral rolls every year,” he noted. “All three of these laws apply in this case, and none of them contains any provision for an SIR.”
He highlighted the one-sided nature of the process: “In today’s controversy we’ve seen deletions, deletions, deletions everywhere. There should also be additions somewhere. If people have migrated from here, they must have gone somewhere. But all these migrations were happening in thin air. Nearly 130 million migrated from where to where?”
On the stated rationale, Quraishi pointed to the launch in Bihar: “When this exercise began, you may recall, in the press conference in Bihar the CEC said that there are lots of infiltrators here, and to catch the infiltrators we will do a Special Intensive Revision. They made 80 million people run around, because they introduced several new things. To this day it is not known how many infiltrators were caught. Please tell us that. That’s interesting. After the revision in Bihar, it never came out how many infiltrators there actually were—the ones for whom, in a way, the whole exercise was being done.”
Full interview on the London Vārta podcast in the comments box.
#cineinkpodcast #LondonVārta #syquraishi #IndiaElectionCommission #SIR
राहुल देव Rahul Dev retweeted
आर्काइव | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में संघ के कई सपने साकार हुए हैं, चाहे वह बाबरी मस्जिद की जगह पर राम मंदिर बनाने का सपना हो या अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर जम्मू और कश्मीर को हासिल विशेष दर्जा छीनने का. संघ की उपरोक्त जीतों में न्यायपालिका की भूमिका भी अहम रही है. इसीलिए एबीएपी को समझना बहुत ज़रूरी हो जाता है.
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) की स्थापना 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वकीलों की शाखा के रूप में की गई थी. आज एबीएपी भारत में वकीलों का शायद सबसे बड़ा संगठन है. अध्ययन मंडलियों, रणनीतिक मुकदमेबाज़ी और निजी रिश्तों के लगातार बढ़ते नेटवर्क के ज़रिए, समाज के बढ़े हिस्से के साथ-साथ देश भर के हज़ारों जिला और ट्रायल कोर्टों में एबीएपी फैल चुका है.
एबीएपी आज एक ऐसे संगठन के रूप में उपस्थित है जो इस देश की ज़्यादातर अदालतों को प्रभावित करने की ताक़त रखता है. इसके के सदस्य बार एसोसिएशनों का नेतृत्व करते हैं, इसके संरक्षक बेंचों पर बैठते हैं और उनके बच्चे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की अगुआई करते हैं, और यहां तक कि हमारे वक़्त के न्यायिक मामलों पर टिप्पणी करते हैं.
इसके सदस्य अब संसद और यहां तक कि केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंच चुके हैं. इनमें महेश जेठमलानी, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज आदर्श कुमार गोयल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बीजेपी और विपक्ष शासित राज्यों के महाधिवक्ता शामिल हैं. इस रिपोर्टिंग के दो सालों में, मैं अलग-अलग तरह के वकीलों से मिला. इनमें से कुछ पैसे से और कुछ सत्ता से लेकिन अमूमन सभी कानून की विकृत कल्पना से आकर्षित हैं जो अति-राष्ट्रवादी से प्रेरित है. वे निचली अदालतों में युवा वकीलों और भारत के विधि विद्यालयों में युवा छात्रों के आदर्शों और महत्वाकांक्षाओं को आकार देते हैं. वे न केवल हमारे समय की हिंदू कट्टरपंथी वास्तविकता का मसौदा तैयार कर रहे हैं, दलील दे रहे हैं और बहस कर रहे हैं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों को चुनौती देने के लिए एक गहरे आंदोलन की ज़मीन तैयार कर रहे हैं.
पढ़ें एबीएपी पर सुशोवन पटनायक का लिखा यह पूरा लेख: hindi.caravanmagazine.in/law…
#RSS100Years #RSSorg #modi
राहुल देव Rahul Dev retweeted
असंकल्पाज्जयेत् कामं क्रोधं कामविवर्जनात्।
अर्थानर्थेक्षया लोभं भयं तत्त्वावमर्शनात्॥
युधिष्ठिर से नारद कहते हैं - संकल्पों का त्याग करके काम को, कामनाओं का त्याग करके क्रोध को, संसार में जिसे अर्थ कहते हैं, उसे अनर्थ समझकर लोभ को और तत्त्वचिंतन से भय पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।
राहुल देव Rahul Dev retweeted
कचरे की गाड़ी 2 लाख में, डस्टबिन के साथ 6 लाख में: 200 LED का रेट 60 लाख, MP के निकायों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीद डाले, बैठक में प्रमुख सचिव बोले- इस साल कार्रवाई होगी; विभागीय बैठक में हुई इस पूरी चर्चा का वीडियो दैनिक भास्कर के पास है, पढ़िए और देखिए क्या-क्या हुआ
#MPNews #HindiNews #MPUrbanBodiesProcurementScam #Bhopal #MohanYadav #Corruption
dainik.bhaskar.com/xS5owevyp…
राहुल देव Rahul Dev retweeted
सत्ता ने जो बताया, वह समाचार नहीं। सत्ता ने जो छिपाया, उसकी खोज पत्रकारिता है! 🔍🖋️
राहुल देव Rahul Dev retweeted
Block Rajya! #VoteChori #GyaneshKumar
राहुल देव Rahul Dev retweeted
A few years ago, Ashu had a high-paying corporate job in London, earning millions. Saurav was writing about the country’s legal system and living a great life. Both had successful careers, financial security and every reason to continue living the lives they had built for themselves.
But they chose to give it all up in the hope of making this country a better place. They had absolutely no reason to leave behind their comfortable lives, take to the streets, face uncertainty and eventually end up in jail. Yet they did.
What I admire most about these two is that despite coming from privileged backgrounds, they chose to fight for those who aren’t as fortunate. They could have easily looked the other way, enjoyed their lives and never bothered about the struggles of people they had never even met. Nobody asked them to make these sacrifices. Nobody expected them to. But they did, because they genuinely care about people beyond themselves.
And to me, that is the greatest quality a human being can have. To stand up for people you don’t know, to fight battles that aren’t your own, and to risk everything you have so that someone else might have a better life.
That’s the kind of people Ashu and Saurav are.
इधर उधर की बात मत कीजिए। मैं तो तीनों से एक ही माँग कर रहा हूँ। आपकी ही है। मैं तो खुद कहता हूँ राहुल गांधी और सोनिया गांधी को अच्छी हिंदी बोलना आना चाहिए। संस्कृत भी आए तो सोने पर सुहागा होगा। लेकिन हिंदू धर्म-संस्कृति-सनातन आदि की दिन-रात बात करने वाले दोनों महापुरुषों से तो हमारी उम्मीदें और ऊँची होनी चाहिए न? और ऊँची न सही इतनी न्यूनतम तो होनी चाहिए न? कभी कहीं ऐसा किया हो इन्होंने तो दिखा दीजिए।
Replying to @RahulDev718370
तीर बहुत गहरे तक चुभ गया सर! मोदी जी और योगी जी को दस नही हजारों-हजार श्लोक कंठस्थ बोलने की क्षमता है। एक मठ के संत, महंत को संस्कृत नही आती होगी, इसे तो योगी का धुर विरोधी भी नही मानेगा। लेकिन आप जिसके पक्ष को लेकर तिलमिलाए हैं, उस सच्चाई को देश हजारो बार देख चुका है।
राहुल देव Rahul Dev retweeted
‘My head hangs in shame!’ Glad @swapan55 said this BUT it needs more than just fine words to rein in the mob that owes allegiance to his own party. What happened to the Bengali middle class reverence for books? Those who claim to worship Ma Durga and Ma Saraswati, then vandalise book stalls during Durga Puja? This is what happens when religion is only an instrument for political power. telegraphindia.com/amp/west-…
राहुल देव Rahul Dev retweeted
Modi govt blocked my Instagram account in India, on 28th September 2026, for a week. They blocked it again on 20th October 2026. This 'PROTEST FRAME' will remain till they stop FEARING political cartoons.
क्या किसी ने प्रधानमंत्री मोदी को, ज़बरदस्ती अपने नाम के आगे योगी लगाने वाले मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को बिना रुके, बिना पर्ची और टेलिप्रॉम्प्टर के धाराप्रवाह १० संस्कृत श्लोक बोलते सुना है?
जिन्होंने किया था वे कायर थे।
Replying to @RahulDev718370
राहुल देव जी, तस्लीमा नसरीन को बंगाल से निकलवा कर वामपंथियों, कांग्रेसियो और टीएमसी वालो ने किस बुद्धि विवेक का परिचय दिया था और हाँ , आप लोग भी तो मौन धारण कर लिए थे
काश ऐसा ही हो यानी वह बिना प्रॉम्प्टर बोलते हों हर जगह। बस उनसे वही करवा दीजिए जो आप राहुल गांधी से चाहते हैं।
Replying to @RahulDev718370
हे प्रभु, ऐसी तुलना तो मत कीजिए! और आप समझते हैं कि मोदी हर समय टेलीप्राम्पटर देखकर बोलते हैं तो सचमुच देश के करोड़ो लोगों को मोतियाबिन्द हो गया है!🙏























