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मैंने तुम्हें छोड़ा नहीं है
बस तुम्हें जाने दिया है
क्योंकि तुम्हें जाना था
तुम कह सकते हो कि...
मैंने हार मान ली या मैंभी औरों सा हूं
पर सत्य यही है कि तुम्हारे लिए मैं किसी से लड़ सकता हूं।
मगर
मैं तुमसे कैसे लड़ूं?
तुम्हें जाने देना मेरे प्रेम की आखिरी कुर्बानी थी।
जैसे सनातनी और देशभक्त केवल #bjp और #संघ वाले #ब्रह्मणवादी होते हैं वैसे ही #हिजाबी और सच्चे कौमपरस्त सिर्फ #मुललावादी #मुसंघी होते हैं। सही है न @asadowaisi 🤔
हिजाबी लड़की को प्रधानमंत्री बनाने का ख़्वाब दिखाने वाले, आज एक मज़बूत हिजाबी सांसद से ही परेशान क्यों हैं?
असदुद्दीन ओवैसी साहब ने कभी कहा था कि एक दिन इस देश की प्रधानमंत्री हिजाब पहनने वाली लड़की बनेगी। ख़्वाब बहुत खूबसूरत है, लेकिन सवाल है कि जब हिजाब पहनने वाली एक मज़बूत लड़की अपने दम पर सियासत में पहचान बना रही है, तो उसे निशाना बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है?
इकरा हसन सिर्फ़ एक हिजाबी मुस्लिम लड़की नहीं, बल्कि अपनी अलग पहचान और राजनीतिक वजूद रखने वाली एक मज़बूत आवाज़ हैं। उनकी सियासत से असहमति हो सकती है, उनकी आलोचना भी की जा सकती है, लेकिन किसी मज़बूत मुस्लिम महिला का राजनीतिक वजूद ही अगर परेशानी का सबब बन जाए, तो फिर हिजाबी प्रधानमंत्री का सपना महज़ एक नारा बनकर रह जाता है।
अब कुछ लोग कहेंगे कि अगर @aimim_national इतना डर लगता है, तो गठबंधन क्यों नहीं कर लेते? सवाल यह भी है कि अगर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दुश्मन हैं, तो फिर उन्हीं के साथ गठबंधन की राजनीति क्यों? मगर इन सवालों का जवाब देने के बजाय बहस को दूसरी तरफ़ मोड़ दिया जाता है।
और रही बात मुस्लिम नेतृत्व की, तो सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या मुस्लिम समाज के पास अपनी पसंद के नेता चुनने का अधिकार नहीं है? क्या हर मज़बूत मुस्लिम नेता को या तो ओवैसी साहब की सियासत के साथ खड़ा होना होगा, या फिर उसे बदनाम करने की कोशिशों का सामना करना पड़ेगा?
इकरा हसन की सीट पर मुस्लिम वोटरों का प्रतिशत देख लीजिए। वहाँ के सारे मुस्लिम वोट भी AIMIM को मिल जाएँ, तब भी चुनाव नहीं जीत सकते है। फिर सवाल ये भी है कि हर मुस्लिम मतदाता AIMIM को ही वोट क्यों दे? मुस्लिम समाज कोई एक वोट बैंक नहीं, जिसके वोट पर किसी एक पार्टी का एकाधिकार हो।
AIMIM को चुनाव लड़ने का पूरा हक़ है। लेकिन उसके चुनाव लड़ने की रणनीति, उसके राजनीतिक असर और उससे होने वाले ध्रुवीकरण पर सवाल उठाने का हक़ भी लोगों को है। लोकतंत्र में किसी पार्टी को सवालों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
@asadowaisi साहब, सवाल आपकी पार्टी के चुनाव लड़ने पर नहीं, आपकी कथनी और करनी के बीच के फ़र्क़ पर है। एक तरफ़ हिजाबी लड़की को देश का प्रधानमंत्री बनाने का ख़्वाब दिखाना और दूसरी तरफ़ एक मज़बूत हिजाबी महिला नेता को राजनीतिक बहस के केंद्र में निशाना बनाना—इस विरोधाभास पर सवाल तो उठेंगे ही।
@IqraMunawwar_ को किसी की सियासी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है। उनकी पहचान, उनकी मेहनत और उनका राजनीतिक वजूद उन्हें अपनी जगह बनाने का हक़ देता है।
मुस्लिम नेतृत्व किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। समाज तय करेगा कि उसे किसे अपना नेता बनाना है धमकी, दबाव या बदनामी के डर से नहीं, बल्कि अपने विवेक से।
#IqraHasan #AsaduddinOwaisi #AIMIM
काफ़ ही तो काफ़ में चह्ल-ए-काफ़ किए बैठा है।
क़ल्ब-ए-ऐ़न-ओ-शीन में एतिकाफ़ किए बैठा है।
🌺
ग़ज़ल
غزل
عین ہے قاف ہے پھر شین لِئے بیٹھا ہوں
حُسنِ جاناں کے مضامین لِئے بیٹھا ہوں
'ऐन है क़ाफ़ है फिर शीन लिए बैठा हूँ
हुस्न-ए-जानाँ के मज़ामीन लिए बैठा हूँ
اُس کے دیدار کی اعجازِ تجلّی مت پوچھ
لبِ تقریر پے آمین لِئے بیٹھا ہوں
उस के दीदार की ए'जाज़-ए-तजल्ली मत पूछ
लब-ए-तक़रीर पे आमीन लिए बैठा हूँ
ہمہ تن گوش ہوں مَیں یا ہمہ تن چشم کہوں
تیرے آگے مَیں اب آئین لِئے بیٹھا ہوں
हमा-तन-गोश हूँ मैं या हमा-तन-चश्म कहूँ
तेरे आगे मैं अब आईन लिए बैठा हूँ
مَیں ترے انکار کی حد دیکھ رہا ہوں کافر
عشق کے ساتھ مرا دین لِئے بیٹھا ہوں
मैं तिरे इंकार की हद देख रहा हूँ काफ़िर
'इश्क़ के साथ मिरा दीन लिए बैठा हूँ
تیرے آغوش میں اِک رات کی مہلت مل جائے
دیر سے عرضیِ تازین لِئے بیٹھا ہوں
तेरे आग़ोश में इक रात की मोहलत मिल जाए
देर से 'अर्ज़ी-ए-ताज़ीन लिए बैठा हूँ
بزمِ تنقید پسندوں میں سُنا کر غزلیں
آفریں ہے کہ مَیں تحسین لِئے بیٹھا ہوں
बज़्म-ए-तनक़ीद-पसंदों में सुना कर ग़ज़लें
आफ़रीं है कि मैं तहसीन लिए बैठा हूँ
بند غم اور ہے قید وفا اور ہے کاف
پھر بھی کیوں صورتِ مسکین لِئے بیٹھا ہوں
बंद-ए-ग़म और है ये क़ैद-ए-वफ़ा और है 'काफ़'
फिर भी क्यों सूरत-ए-मिस्कीन लिए बैठा हूँ
- کاف
- काफ़
आप जैसे लोग इस पृथ्वी पर अमन व सुकून के लिए ज़हर सोखने वाले एलिमेंट हैं। चाहे मुसंघी हो या संघी उसे बुरा लगना तय है।
पर हक़ यही है के हक़ वो बातिल की जंग थी है और रहेगी।
संघियों की सोच इतनी संकुचित और मानसिक दिवालियापन इतना ज़्यादा है कि इनकी कल्पना में एक रघुवंशी राजपूत (हालाँकि मैं जाति का गौरव कभी नहीं करता) उर्दू जानने वाला, इस्लामिक दर्शन की समझ रखने वाला सेकुलर इंसान हो ही नहीं सकता। ये राम राज्य को क्या ही समझ पाएंगे। 🤦🏽
इन गोडसे की औलादों ने कभी ख़ुद कोई पढ़ाई लिखाई की नहीं है कपोल कथाओं के इतिहास को अपना गौरव बनाए घूम रहे और समस्त समाज को ही अपने जैसा जाहिल समझते हैं। तर्क का कोई जवाब नहीं है, मुल्ला बोल के सोचते हैं तीर मार दिया। पता नहीं कौन से मूल्ले ने इनकी नाभि में कब कैसा तीर मारा है कि इनकी सात पुश्तें आज तक मवाद ग्रसित हैं।
Imran ع Chishti retweeted
जो कूटनीति हो रही है वो नेशन-स्टेट के बीच नहीं है।
मार्को रूबियो का साउथ ब्लॉक छोड़कर सीधे जामनगर जाना यह बताता है कि 21 वीं सदी में अगर किसी देश की संप्रभुता को मोड़ना है तो बस यही काफ़ी है कि उसके पॉलिसी मेकर्स की पुरानी फ़ाइल सही समय पर टेबल पर ले आई जाये और उसके सबसे बड़े व्यापारिक साम्राज्य को अपने प्रॉफिट के जाल में फँसा लिया जाए!
विदेशनीति कुल जमा इतनी है कि किसी राष्ट्रपति के बेटे के वेंचर में किस कॉर्पोरेट घराने ने पैसा लगाया है और किस मंत्री की कौन सी पुरानी फ़ाइल अमेरिकी न्याय विभाग की तिजोरी में बंद है!
#TheCompromisedPM
#TheBlackmailedDalal, सुन लो।
बाज़ अगर थोड़ी देर उड़ान छोड़ दे तो आसमान गिद्धों का नहीं हो जाता।
अर्थात~ देशभक्त अगर शांत हो जाएं तो देश गद्दारों का नहीं हो जाता! हां सत्ता दलालों के पास जरूर चली जाती है। और देश का मतलब न सत्ता होती है न कोई पार्टी।
@RahulGandhi जी इस देश में असल लड़ाई #bjp vs #कांग्रेस नहीं है बल्कि लड़ाई है~
#ब्रह्मणवाद/#मनुवाद/#मुल्लावाद vs #संविधान
देश के दुश्मन संस्थान हैं #rss~
#राष्ट्रीय_सत्यसंहारक_संघ और #पूंजीवाद
हम मिश्रित अर्थव्यवस्था हैं लेकिन कितना %?
और कौन कौन से सेक्टर??
क्या शिक्षा को मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंदर रख कर किसी भी आरक्षण नीति से समानता की कल्पना की जा सकती है???@INCIndia @priyankagandhi
ओ भोसड़ी वाले चच्चा! तुम्हें तो इन चूतिये अफसरों का पता है पर हमें तो तेरे नपुंसक संघी बापों का भी पता है कि कौन कौन कब कहां क्या घोटाला किया है।
सिंहासन ख़ाली करो जनता आती है।
#EpstienFiles
#दशहरा
#HappyDussehra
Imran ع Chishti retweeted
غزل
ग़ज़ल
اُسے جاناں اُسے کعبہ اُسے قبلہ کہا میں نے
وہی انور وہی باطن اُسے کیا کیا کہا میں نے
उसे जानाँ उसे का'बा उसे क़िब्ला कहा मैं ने
वही अनवर वही बातिन उसे क्या क्या कहा मैं ने
اُسی خالق نے کی تخلیق تو قائم ہوئی دنیا
وہی گزرا وہی دوراں جسے فردا کہا میں نے
उसी ख़ालिक़ ने की तख़लीक़ तो क़ायम हुई दुनिया
वही गुज़रा वही दौराँ जिसे फ़र्दा कहा मैं ने
اُسے کس طور کوئی سمجھے سمجھاؤں بھلا کیسے
وہی غائب وہی حاضر وہی پردہ کہا میں نے
उसे किस तौर कोई समझे समझाऊँ भला कैसे
वही ग़ाइब वही हाज़िर जिसे पर्दा कहा मैं ने
وہی جلوت وہی خلوت وہی ہلچل میں ہے شامل
وہی جنگل وہی صحرا جسے دریا کہا مَیں نے
वही जलवत वही ख़लवत वही हलचल में है शामिल
वही जंगल वही सहरा जिसे दरिया कहा मैं ने
وہی غزلیں وہی نظمیں وہی معنی بنا بیٹھا
وہی اُولیٰ وہی ثانی جسے مصرع کہا مَیں نے
वही ग़ज़लें वही नज़्में वही मा'नी बना बैठा
वही ऊला वही सानी जिसे मिस्रा कहा मैं ने
اُسے سوچا اُسے لکّھا مگر سمجھا نہیں اب تک
جسے ساکن جسے حرکت جسے نقطہ کہا مَیں نے
उसे सोचा उसे लिक्खा मगर समझा नहीं अब तक
जिसे साकिन जिसे हरकत जिसे नुक़्ता कहा मैं ने
اُسے چاہا اُسے کھوجا اُسے پایا نہیں لیکن
جسے گایا جسے پوجا جسے شیوَہ کہا مَیں نے
उसे चाहा उसे खोजा उसे पाया नहीं लेकिन
जिसे गाया जिसे पूजा जिसे शेवा कहा मैं ने
وہی بندہ وہی مالک وہی رستہ کہے خود کو
جسے قربت جسے دوری جسے سجنا کہا مَیں نے
वही बंदा वही मालिक वही रिश्ता कहे ख़ुद को
जिसे क़ुर्बत जिसे दूरी जिसे सजना कहा मैं ने
وہی ہر دم وہی بے دم وہی دم کاف کا دم ہے
جسے ہونا جسے جینا جسے مرنا کہا مَیں نے
वही हर दम वही बे-दम वही दम 'काफ़' का दम है
जिसे होना जिसे जीना जिसे मरना कहा मैं ने
- کاف
- काफ़
Imran ع Chishti retweeted
मोहन यादव के राज में सरकारी खरीद में करोड़ों के घोटाले का सबूत है ये वीडियो.
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे सामने बैठे अधिकारियों से जो कह रहे हैं , उसे सुनिए .
इसके बाद MPSEDC के
एडिशनल एमडी अंशुमान राज का प्रेजेंटेशन देखिए .
Imran ع Chishti retweeted
राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जी @Pawankhera एपस्टीन मामले को बेहद नजदीक से समझने देखने वाले वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हरदीप - एपस्टीन संवाद की तमाम परतें खोली थी। तस्वीरों के सामने आने के बाद वो जो कह रहे हैं वो महत्वपूर्ण है।
"जेफरी एपस्टीन के साथ हरदीप पुरी की अकेली तस्वीर ने उनके इस दावे को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया है कि वे कुख्यात यौन तस्कर से केवल एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मिले थे।
पुरी का दावा है कि आठ वर्षों में उनकी 1-2 मुलाकातें और 3-4 ईमेल हुए थे। इसे कहने का यह एक बड़ा चालाकी भरा तरीका है।
लेकिन हममें से जिन्होंने फाइलों के सामने आने पर उनका गहन अध्ययन किया था, वे शुरू से ही जानते थे कि कहानी उससे कहीं अधिक विस्तृत थी जितना वह हमें विश्वास दिलाना चाहते थे। अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर मौजूद एपस्टीन फाइलों के अनुसार,
केवल 3 वर्षों (2014-17) की अवधि में, एपस्टीन और हरदीप के बीच कम से कम 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ।
अब तक हमें जितनी जानकारी है, उसके अनुसार 14 बैठकें और विस्तृत बातचीत हुई थीं, और उनमें से कई व्यक्तिगत मुलाकातें थीं।
हाल ही में सामने आई तस्वीरों ने हमारे दावों को और भी पुख्ता कर दिया है, जबकि कुछ सवाल अभी भी बने हुए हैं:
तो क्या केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री जनता को गुमराह करना बंद करेंगे और एपस्टीन के साथ अपने संबंधों/सहयोग की वास्तविक सीमा का खुलासा करेंगे?
एपस्टीन के साथ उनकी कई मुलाकातों में से कौन सी मुलाकात उनकी हाल ही में सामने आई अकेले की तस्वीर में कैद है?
सबसे महत्वपूर्ण बात, इस मुलाकात का असल मकसद क्या था?
और क्या भारत सरकार अपने केंद्रीय मंत्री की एक दोषी बाल यौन तस्कर के साथ इस शर्मनाक संलिप्तता की जांच करने का नैतिक साहस दिखाएगी?"
Imran ع Chishti retweeted
Sofa
Walls
Table
Chairs
Room lighting
High-end acoustic wall panels
Everything matches.
This is the SAME ROOM.
Imran ع Chishti retweeted
چلو مانا کہ کعبہ حج کی منزل ہے
مگر کعبے کا کعبہ تو مرا دِل ہے
चलो माना कि का'बा हज की मंज़िल है
मगर का'बे का का'बा तो मिरा दिल है
اگر میں نورِ الٰہی سے بنا ہوں تو
وہی جلوہ مری رگ رگ میں شامل ہے
अगर मैं नूर-ए-इलाही से बना हूँ तो
वही जलवा मिरी रग रग में शामिल है
- کاف
- काफ़
Imran ع Chishti retweeted
सेक्स ओफेंडर जैफरी एपस्टीन से भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की यह तस्वीर खूबसूरत है।रावणों के चेहरे विजयादशमी पर सामने आ ही जाते हैं।
जेफरी एपस्टीन की ओर से हरदीप पुरी निरंतर अपने राजनयिक संपर्कों और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे थे, जिन्हें 2008 में एक नाबालिग से जुड़े यौन तस्करी के मामले में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था।
फिर से याद करिए हरदीप पुरी ने सीरियल रेपिस्ट और सेक्स ट्रैफिकर जैफरी एपस्टीन के दोस्त को अपने रसूख का इस्तेमाल कर तात्कालिक वीजा उपलब्ध कराया था।
हरदीप और एपस्टीन के संबंध कितने गहरे थे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 24 अक्टूबर 2014 को एपस्टीन ने हरदीप पुरी को लिखा था“मेरी सहायक को भारत में एक शादी में शामिल होने के लिए तुरंत वीज़ा चाहिए। क्या दूतावास में कोई ऐसा व्यक्ति है जिससे वह बात कर सके?” हरदीप पुरी ने इसे एक सामान्य प्रश्न नहीं माना। उन्होंने हस्तक्षेप करने के लिए हर संभव प्रयास किया - सेवानिवृत्त राजदूत प्रमोद बजाज और न्यूयॉर्क में स्थित संजीव नामक व्यक्ति को ईमेल भेजकर एपस्टीन की सहायता करने का निर्देश दिया था।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जी @Pawankhera जी के पूर्व में पूछे गए सवाल इस तस्वीर के सामने आने के बाद एक बार फिर जेरेगौर हैं।
1. हरदीप पुरी ने किसी को, विशेष रूप से एपस्टीन के करीबी लोगों को, सहायता दिलाने में जल्दबाजी करने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक प्रभाव का अनुचित उपयोग क्यों किया?
2. एक दोषी यौन अपराधी के साथ काम करने वाले व्यक्ति के लिए दरवाजे खोलने से पहले, हरदीप पुरी ने यह सत्यापित करने के लिए क्या उचित जांच-पड़ताल की कि यह यात्रा वास्तव में "एक शादी" के लिए थी - न कि भारत की सुरक्षा और गरिमा के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी घृणित गतिविधि के लिए?
3. इस शर्मनाक संबंध से उन्हें क्या लाभ मिल रहा था कि वे एपस्टीन को लाभ पहुंचाने और उसके लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार थे?
4. क्या हरदीप पुरी अब भी यही मानते हैं कि एपस्टीन के साथ उनकी बातचीत केवल "डिजिटल इंडिया" को बढ़ावा देने तक सीमित थी?
























