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हम पहले से कहते आ रहे हैं पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज के लोगों से कि बीजेपी की B-Team के चक्कर में मत पड़ो। यूपी में समाजवादी पार्टी और बीजेपी में ही टक्कर की लड़ाई है और बाकी पार्टियाँ बस वोट काट रही हैं। MLC चुनाव के नतीजों को देखकर अब तो शायद पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज के लोगों को साफ-साफ दिख गया होगा। और जो पार्टियाँ हैं, वो बस वोट कटवा हैं। इसलिए अपना वोट खराब मत करो, एकजुट होकर 2027 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ रहो।
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बीजेपी ने ऐसा जाल बिछाया है, जिसमें कुछ मुसलमान फँसते हुए नजर आ रहे हैं। बीजेपी ओवैसी जी को मैदान में इसी मकसद से उतारती है और काफी हद तक सफल भी रहती है। ओवैसी जी अपनी हर जनसभा में अखिलेश यादव जी का जमकर विरोध करते हैं, ताकि मुसलमान अखिलेश यादव जी से नफरत करने लगें। बीजेपी यही चाहती भी है कि मुस्लिम, अखिलेश यादव जी को छोड़कर चाहे जिसे वोट करें, फायदा बीजेपी को ही होगा। क्योंकि बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच ही असली लड़ाई है। बाकी पार्टियाँ इस रेस से बाहर हो चुकी हैं।
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कल से लेकर आज का दिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए मायूस करने वाला रहा। इजराइल का मामला भी अभी फंसा हुआ है यूपी से भी काफी उम्मीदें थी लेकिन उम्मीद पर रिजल्ट खरा नहीं उतरा। पक्ष में रिजल्ट होता तो अब तक व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में जश्न का माहौल होता। न्यूज़ वालों को भी कंटेंट नहीं मिल रहा है वह भी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी ग्रुप देखते रहते हैं।
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छाया और पूजा को गोद लेने के बाद रवीना टंडन 46 साल की उम्र में नानी बन चुकी है। यह दोनों बेटियां उनके कजिन की है। छाया और पूजा के पेरेंट्स की डेथ हो जाने के बाद रवीना टंडन कानूनी रूप से उनकी पेरेंट्स बनी। 1995 मात्र 21 साल की उम्र में रवीना टंडन ने दोनों छाया और पूजा को गोद ले लिया था। दोनों की देखभाल करके छाया को एयर होस्टेस बना दिया और पूजा इन्वेस्टमेंट बैंकर बन गई है। मात्र 21 साल की उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी लेने के बाद रवीना टंडन ने..1/2
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Jio के कुछ शेयर बेचकर Mukesh Ambani एक बड़ी रकम जुटाना चाहते थे। मगर IPO ने शुरुवाती 3 दिनों में ही मार्केट में धमाल मचा दिया। मात्र 72 घंटे में शेयर खरीदने के लिये 22 गुना अधिक मांगे आयीं। कुल 1 करोड़ 39 लाख लोगों ने आवदेन कर दिलचस्पी दिखायी है। और इसके साथ ही Hyundai Motor India का रिकॉर्ड...1/2
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चुनाव के समय दल बदलने वाले नेता मौसम वैज्ञानिक की तरह होते हैं। उन्हें पहले ही हवा का रुख पता चल जाता है कि सत्ता किसके हाथों में जाने वाली है! उत्तर प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। रोज़ BJP, BSP और दूसरी पार्टियों के नेता बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी से जुड़ रहे हैं। इसे देखकर तो ऐसा लग रहा है कि 2027 में समाजवादी पार्टी की लहर नहीं, सुनामी आने वाली है!
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⚡️ यूपी विधानसभा ग्राउंड रिपोर्ट: महोबा (AC-230) 2022 में BJP के राकेश कुमार गोस्वामी ने सपा के मनोज तिवारी को 43,447 वोटों से हराया था। 2024 लोकसभा चुनाव में BJP की बढ़त घटकर 13,999 वोट रह गई। यानी मुकाबले का अंतर काफी कम हुआ। 📊 2022 विधानसभा परिणाम BJP — 94,490 वोट सपा — 51,043 वोट बसपा — 38,296 वोट BJP की जीत का अंतर — 43,447 वोट 📊 2024 लोकसभा में महोबा विधानसभा क्षेत्र BJP — 93,076 वोट सपा — 79,077 वोट बसपा — 17,281 वोट BJP की बढ़त — 13,999 वोट 📌 जातीय समीकरण (अनुमानित) दलित — आबादी करीब 23.37%, यानी लगभग 1 लाख लोग मुस्लिम — आबादी करीब 7.7%, यानी लगभग 33 हजार लोग राजपूत — प्रमुख प्रभावशाली जातीय समूह ब्राह्मण — अहम सवर्ण वोट लोधी, यादव, कुशवाहा, साहू और अन्य OBC — चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका महोबा विधानसभा में 2024 की मतदाता सूची के अनुसार करीब 3.26 लाख मतदाता थे। दलित और मुस्लिम के आँकड़े आबादी के अनुमान हैं, सीधे वोटरों की संख्या नहीं। राजपूत, ब्राह्मण और अलग-अलग OBC जातियों के विश्वसनीय जातिवार आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 2027 में BJP के सामने अपनी बढ़त बनाए रखने की चुनौती होगी, जबकि सपा 2024 में घटे अंतर को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। बसपा का वोट भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।
⚡️ यूपी विधानसभा ग्राउंड रिपोर्ट: 227 - मेहरौनी (ललितपुर, SC) मेहरौनी में 2022 में BJP के मनोहर लाल पंथ ‘मन्नू कोरी’ ने बसपा को 1.10 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में BJP की बढ़त घटकर सिर्फ 17,717 वोट रह गई। यानी मुकाबले की तस्वीर में बड़ा बदलाव आया। 📊 2022 विधानसभा BJP के मनोहर लाल पंथ — 1,84,778 वोट बसपा की किरण रमेश खटीक — 74,327 वोट सपा के राम विलास — 58,381 वोट BJP की जीत का अंतर — 1,10,451 वोट 📊 2024 लोकसभा BJP के अनुराग शर्मा — 1,56,512 वोट कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य — 1,38,795 वोट बसपा के रवि प्रकाश — 16,803 वोट BJP की बढ़त — 17,717 वोट 📌 जातीय समीकरण (अनुमानित संख्या) अहिरवार — करीब 60–67 हजार कोरी — प्रमुख दलित समुदाय कुशवाहा — अहम संख्या यादव — अहम संख्या लोधी, कुर्मी, ब्राह्मण और ठाकुर — चुनावी समीकरण में प्रभावशाली मेहरौनी SC आरक्षित सीट है। यहां दलित समाज के अलग-अलग समुदायों के साथ OBC और सवर्ण मतदाताओं की भूमिका भी अहम है। 2027 में BJP के सामने अपनी बड़ी विधानसभा जीत दोहराने की चुनौती होगी, जबकि विपक्ष के लिए 2024 की बढ़त को मजबूत करना जरूरी होगा।
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गोरखपुर की जया पाल बहुत गरीब है इनके पास घर नहीं था कच्चे घर में रहती थी मंतोष यादव ने घर बनवाकर दिया। दो दिन से कन्नौज के एक ग़ालिबाज की पिटाई पर जो पाल युवा छाती पीट रहे थे वो कहीं दिख नहीं रहे। जाकर पूछे उस बौने से पाल समाज के लिए क्या किया उसने।
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ये भारत के सबसे बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री की भाषा है। शायद ऐसी भाषा बोलते हुए इन्हें आनंद की अनुभूति होती होगी। उत्तर प्रदेश की जनता का दुर्भाग्य है कि ऐसे नफरती लोगों को झेलना रहे हैं। वैसे, इनका आधा काम तो ओवैसी जी खुद ही कर रहे हैं, तो दूसरों को क्या कहें!
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अखिलेश यादव जी ने PDA का सिर्फ नारा नहीं दिया, बल्कि जरूरतमंद PDA परिवारों को सहारा भी दिया। सोचो, जो इंसान बिना सरकार में रहे ही रोज किसी न किसी की मदद कर रहा है, अगर वह इंसान सरकार में आ जाएगा तो कितनी मदद करेगा! आज सपा कार्यालय में अखिलेश यादव जी ने गरीब PDA परिवारों को PDA भवन की चाबी दी। जया पाल सयानी पासवान सुमित्रा निषाद अलीमून निशा चंपा भारती सोचो, आज ये लोग कितने खुश होंगे! इनके चेहरों पर कितनी मुस्कान होगी। 2027 से अखिलेश यादव जी की वजह से यूपी की जनता के चेहरों पर खुशियां होंगी।
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मुझे लोगों से जुड़ने में कोई भी परेशानी नहीं आती है,चाहे अकाउंट छोटा हो या बड़ा। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं,जो फॉलोबैक लेने के बाद अनफॉलो कर देते हैं। ऐसा करने के बाद पता नहीं कौनसा लाभ प्राप्त होता है इन लोगों को।
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वो महोदय राम कृष्ण को नहीं मानेंगें, ऐसी प्रतिज्ञा तो ले लेते हैं लेकिन अपने बच्चों का ब्याह हिन्दू रीति रिवाज से ही करते हैं। कार्ड छपवाएंगें तो गणेश जी फोटो बनी रहेगी वैदिक मंत्र लिखे रहेंगें। ये सब दिखावे के लोग हैं एयर अपनी पर आने पर सारा कुछ घर के हिसाब से करते हैं।
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बीजेपी छोटे-मोटे मामलों की वजह से समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान साहब को परेशान कर रही है। और दूसरी तरफ लखनऊ में 700 करोड़ रुपये की खुद की मूर्तियां बनवाई गईं, लेकिन उन पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब बीजेपी की B टीम नहीं कहेंगे, तो क्या कहेंगे
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किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ गैंगस्टर्स की बेगुनाही साबित करेगा। वाह रजत शर्मा वाह किसी दिन ये न बोल देना कि लॉरेंस विश्नोई तो संत आदमी है पिछले 11 साल से मौन तपस्या में लीन है। अच्छे व्यवहार के लिए उसकी सजा माफ कर दो।🤡
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एक बात समझ नहीं आयी, बाबू के मम्मी पापा उसके भैया भाभी कैसे हो गए 🤔
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⚡️ यूपी विधानसभा ग्राउंड रिपोर्ट: 220 - कालपी (जालौन) कालपी में 2022 का मुकाबला बेहद करीबी रहा। सपा के विनोद चतुर्वेदी ने निषाद पार्टी के छोटे सिंह को सिर्फ 2,816 वोटों से हराया, जबकि बसपा भी मजबूत स्थिति में रही। 📊 2022 विधानसभा सपा के विनोद चतुर्वेदी — 69,782 वोट निषाद पार्टी के छोटे सिंह — 66,966 वोट बसपा के श्याम पाल उर्फ चुन्ना पाल — 64,683 वोट जीत का अंतर — 2,816 वोट 📊 2024 लोकसभा सपा के नारायण दास अहिरवार — 1,07,057 वोट BJP के भानु प्रताप सिंह वर्मा — 88,887 वोट बसपा के सुरेश चंद्र गौतम — 20,911 वोट सपा की बढ़त — 18,170 वोट जातीय समीकरण: कालपी में कुशवाहा, यादव, निषाद, दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका अहम हो सकती है। हालांकि, सीट के आधिकारिक जातिवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 2027 में सपा के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती होगी। वहीं निषाद पार्टी और बसपा की भूमिका मुकाबले का समीकरण बदल सकती है।
⚡️ यूपी विधानसभा ग्राउंड रिपोर्ट: 219 - माधौगढ़ (जालौन) माधौगढ़ में 2022 में BJP ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा क्षेत्र में सपा ने बढ़त बना ली। यानी विधानसभा और लोकसभा चुनाव के नतीजों में फर्क देखने को मिला। 📊 2022 विधानसभा BJP के मूल चंद्र सिंह — 1,05,231 वोट BSP की शीतल कुशवाहा — 70,257 वोट SP के राघवेंद्र प्रताप सिंह — 63,035 वोट जीत का अंतर — 34,974 वोट 📊 2024 लोकसभा SP के नारायण दास अहिरवार — 1,09,929 वोट BJP के भानु प्रताप सिंह वर्मा — 1,01,339 वोट BSP के सुरेश चंद्र गौतम — 21,391 वोट सपा की बढ़त — 8,590 वोट जातीय समीकरण: माधौगढ़ ग्रामीण क्षेत्र वाली सीट है। यहां कुशवाहा, यादव, लोधी, ब्राह्मण, ठाकुर और दलित समाज की भूमिका अहम हो सकती है। सीट-वार जातीय आंकड़ों का कोई आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। 2027 में BJP के सामने अपनी विधानसभा सीट बचाने की चुनौती होगी, जबकि सपा 2024 की बढ़त को जीत में बदलने की कोशिश करेगी।
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जब मकसद बीजेपी को हराना और यूपी में बदलाव लाना है, तो वोट भी उसी हिसाब से देना चाहिए। लेकिन कुछ लोग बसपा और AIMIM जैसी पार्टी को अपना वोट देकर अपना वोट खराब कर देते हैं। फिर पांच साल रोते हैं कि रोजगार नहीं मिल रहा है, महंगाई बहुत बढ़ गई है, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद खराब है। घर पर बुलडोजर चल रहे हैं, ऐसी तमाम बातें करेंगे, लेकिन जब चुनाव आता है तो सब कुछ भूल जाते हैं।
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ओवैसी एंड कंपनी - मुस्लिम 20% है यादव 11% है तो मुख्यमंत्री हम बनेंगे। ठीक है भाई 403 विधानसभा सीट लड़कर देख ले अगर कुछ मुस्लिमों के अलावा एक भी हिंदू तुमको वोट दे दे तो बन जाना मुख्यमंत्री। अखिलेश यादव 11% यादव वोटो से मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं उनको हिंदू भी वोट देता है समझ आया। मुख्यमंत्री कोई खिलौना है जो यादव अपनी जमीन बेचकर, खरीदकर दे दे तुमको, जाकर वोट ले लो न हिंदुओं से। बिना हिंदू के 2,3 सीट छोड़कर कौनसी सीट जीत लोगे जहां से मुख्यमंत्री बन जाओगे फालतू की बकैती करते हो।
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उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को 12.38% वोट मिले थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 9.39% रह गया, यानी करीब 3% की गिरावट। इस हिसाब से 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा का वोट प्रतिशत घटकर 5% तक सिमट सकता है। इसलिए जो लोग आज भी बसपा के साथ हैं, अगर उन्हें बीजेपी को हराना है ,तो उन्हें बसपा का मोह छोड़कर समाजवादी पार्टी का साथ देना चाहिए।
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ओवैसी जी बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए हैदराबाद से यूपी में प्रकट हुए हैं। फायदा पहुंचाकर वापस हैदराबाद चले जाएंगे, लेकिन चुनाव के बाद पछताना यूपी की जनता को पड़ेगा। इसलिए भावनाओं में नहीं, सोच-समझकर फैसला कीजिए!
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