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डाक्टर मनमोहन सिंह नें जनवरी 2014में कहा था,
कि नरेंद्र मोदी, देश को बर्बाद तबाह करनें वाला
प्रधानमंत्री सिद्ध होगा। मैं इससे सहमत हूं,
क्या आप सहमत हैं?
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Warm birthday wishes to @SupriyaShrinate ji!
Wishing you good health, happiness and another year of taking on the BJP with the same courage and conviction.
Keep fighting the good fight!
'वोट चोरी' देशद्रोह है, लोकतंत्र से गद्दारी है।
BJP-चुनाव आयोग ने 'वोट के अधिकार' पर हमला करने की हिमाकत की है।
लेकिन 'वोट चोर' याद रखें- हम किसी गद्दार को नहीं छोड़ेंगे, सबको सजा दिलाएंगे।
🗓️ 1 नवंबर | जन मार्च और महारैली
📍 रामलीला मैदान, नई दिल्ली
#ChaloDilli
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"ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक हम नहीं रुकेंगे"
दिल्ली के त्रिलोकपुरी में राहुल गांधी ने कहा
@RahulGandhi | Rahul Gandhi | #RahulGandhi
नरेंद्र मोदी हमेशा से अमेरिका के आगे झुकते रहे हैं। देश और देशवासियों का नुकसान करवाकर, अमेरिका को फायदा पहुंचाते रहे हैं।
BJP सांसद और मोदी सरकार में विदेश सचिव रहे हर्ष वर्धन श्रृंगला ने बताया 👇
''जब मैं विदेश सचिव था, तब एक अमेरिकी अधिकारी ने भारत से कहा था कि हम रूस से तेल की खरीद कम करें।
उससे पहले, अमेरिका ने ही हमसे ईरान से तेल न लेने को कहा था और हमने वैसा ही किया।
फिर हमसे वेनेजुएला से तेल लेना बंद करने को कहा गया, जबकि हमने वहां 6 बिलियन डॉलर का निवेश किया था।''
ये बयान बताता है कि नरेंद्र मोदी पूरी तरह से Compromised हैं और अमेरिका के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।
Sukhdev singh retweeted
"𝑻𝒉𝒆𝒓𝒆’𝒔 𝒃𝒐𝒖𝒏𝒅 𝒕𝒐 𝒃𝒆 𝒔𝒐𝒎𝒆 𝒕𝒂𝒎𝒂𝒔𝒉𝒂 𝒘𝒉𝒆𝒏 𝒕𝒉𝒊𝒔 𝒃𝒐𝒐𝒌 (𝑩𝒆𝒍𝒐𝒏𝒈𝒊𝒏𝒈: 𝑨 𝑱𝒐𝒖𝒓𝒏𝒆𝒚 𝒐𝒇 𝑳𝒐𝒗𝒆) 𝒄𝒐𝒎𝒆𝒔 𝒐𝒖𝒕.
𝑨𝒇𝒕𝒆𝒓 𝒂𝒍𝒍, 𝒐𝒕𝒉𝒆𝒓𝒔 𝒉𝒂𝒗𝒆 𝒔𝒑𝒆𝒏𝒕 𝒅𝒆𝒄𝒂𝒅𝒆𝒔 𝒕𝒆𝒍𝒍𝒊𝒏𝒈 𝒎𝒚 “𝒔𝒕𝒐𝒓𝒚”, 𝒏𝒐𝒘 𝒊𝒕’𝒔 𝒎𝒚 𝒕𝒖𝒓𝒏."
: CPP Chairperson Smt. @SoniaGandhi ji
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चुनाव आयोग ने कल शाम सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है, वह भ्रामक (Deceptive), छलपूर्ण (Deceitful) और दोहरी नीयत से भरा (Duplicitous) है। यह खुद चुनाव आयोग के लिए भी बेहद नुकसानदेह है।
1. Form 6 में गैरकानूनी संशोधन: इस मुद्दे पर ECI ने साफ तौर पर धोखा देने और शब्दों की बाजीगरी करने की कोशिश की है। पहले उसने दावा किया कि Form 6 के साथ जोड़े गए नए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था, जबकि बाद में कोर्ट ने खुद इस दावे का खंडन कर दिया। दूसरा, अब ECI दावा कर रहा है कि नया डिक्लेरेशन फॉर्म अलग है और Form 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया। लेकिन यह भी एक धोखा है-क्योंकि इस अनिवार्य डिक्लेरेशन को भरे बिना ऑनलाइन Form 6 जमा ही नहीं किया जा सकता था। तीसरा, ECI का अपना स्टैंड लगातार बदल रहा है। 26 सितंबर 2026 को उसने कहा था कि यह डिक्लेरेशन Form 6 के साथ जोड़ा गया है। अब वह कह रहा है कि यह Form 6 का हिस्सा नहीं है। ECI इस तरह Registration of Electors Rules, 1960 के खुलेआम उल्लंघन पर पर्दा नहीं डाल सकता।
2. CEC के एकतरफा फैसले: ECI अब यह दावा करके मुद्दे को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रहा है कि SIR से जुड़े प्रमुख आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों ने औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी। लेकिन दोनों चुनाव आयुक्तों (ECs) ने CEC के आदेशों पर हो रहे गंभीर उल्लंघनों और गैरकानूनी कार्रवाइयों के खिलाफ आधिकारिक रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यहां तक कि दोनों ECs को इन फैसलों की जानकारी भी नहीं दी गई थी और उन्हें इनके बारे में खबरों से पता चला। यह सर्वसम्मति से फैसले लेना नहीं, बल्कि एकतरफा निर्णय लेने का मामला है।
3. ECINet के जरिए गैरकानूनी केंद्रीकरण: मतदाता सूचियों पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने और वैधानिक अधिकार रखने वाले इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) के फैसलों को दरकिनार करने के लिए ECINet के इस्तेमाल का मुद्दा दोनों ECs ने आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कराया था। लगभग हर उस राज्य से EROs के फैसलों को पलटे जाने के सबूत सामने आए हैं, जहां SIR हुई है। इनमें गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्य शामिल हैं।
4. मनमानी करने वाला IT डिवीजन: दोनों चुनाव आयुक्तों ने बार-बार चिंता जताई थी कि IT डिवीजन का कामकाज अपारदर्शी है, वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करता है और बिना अनुमति के फैसले लेता है। उन्होंने ECINet और IT डिवीजन के कामकाज को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा था। इसके बाद से IT डिवीजन में फैली अव्यवस्था को लेकर कई और खुलासे सामने आए हैं। लेकिन न तो उसके कामकाज में कोई बदलाव हुआ है और न ही इन मुद्दों पर कोई कार्रवाई की गई है।
5. SIR की विनाशकारी प्रक्रिया: SIR प्रक्रिया में कई गैरकानूनी कार्रवाइयां और नियमों के उल्लंघन सामने आए हैं। लगभग हर राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form 7 का दुरुपयोग किया गया है।
6. खुलासों से इनकार नहीं: हलफनामे में मीडिया के बड़े हिस्से में लगातार सामने आ रहे खुलासों की सच्चाई से इनकार नहीं किया गया है। यह CEC द्वारा की गई गंभीर गड़बड़ियों और कानूनी उल्लंघनों की एक और पुष्टि है।
झूठ बोलने की शुरुआत करते ही इंसान अपने ही बुने जाल में उलझता चला जाता है। और जब लंबे समय तक यही सिलसिला चलता रहता है, तो आखिरकार उसका झूठ किसी न किसी तरीके से सामने आने लगता है।
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नरेंद्र मोदी हमेशा से अमेरिका के आगे झुकते रहे हैं। देश और देशवासियों का नुकसान करवाकर, अमेरिका को फायदा पहुंचाते रहे हैं।
BJP सांसद और मोदी सरकार में विदेश सचिव रहे हर्ष वर्धन श्रृंगला ने बताया 👇
''जब मैं विदेश सचिव था, तब एक अमेरिकी अधिकारी ने भारत से कहा था कि हम रूस से तेल की खरीद कम करें।
उससे पहले, अमेरिका ने ही हमसे ईरान से तेल न लेने को कहा था और हमने वैसा ही किया।
फिर हमसे वेनेजुएला से तेल लेना बंद करने को कहा गया, जबकि हमने वहां 6 बिलियन डॉलर का निवेश किया था।''
ये बयान बताता है कि नरेंद्र मोदी पूरी तरह से Compromised हैं और अमेरिका के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।
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83 years later, history echoes again. From “दिल्ली चलो” to “चलो दिल्ली”! 🇮🇳
#ChaloDilli
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एक नवम्बर को चलो दिल्ली रामलीला मैदान ❤️!!
राहुल गांधी जी जिंदाबाद जिन्दाबाद 💐 💐 ❤️!!
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डी.वाई. चंद्रचूड़ अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए हर समझौता करने को तैयार रहते थे
CJI बनने के बाद भी उन्होंने गणेश पूजा के लिए मोदी को अपने घर बुलाकर न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाई
: मार्कंडेय काटजू, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश
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The AAP government is doing everything possible to suppress the demand for justice for Parminder Singh Jhota.
- S. Pargat Singh, President, Punjab Congress @PargatSOfficial
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Just as the @BJP4India used authoritarian tactics to throw Opposition MPs out of Parliament, its B-team @AamAadmiParty has done the same to Congress MLAs in the Punjab Assembly today.
Democracy cannot survive when those in power silence the Opposition.

























