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सबसे बड़े घुसपैठिए यूपी में है उत्तराखंड के।
ठाकुर अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड के घुसपैठिये हैं उत्तर प्रदेश में।
जब विभाजन हो गया फिर कोई बाहरी मुख्यमंत्री क्यों?
I.P. Singh retweeted
उत्तर प्रदेश की देवतुल्य जनता-जनार्दन का आशीर्वाद है 2027 मे 'सर्वसमाज' की समाजवाद की सरकार होगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले हजारों करोड़ रुपये के टेंडरों की प्रक्रिया में कथित तौर पर हेराफेरी कर कमीशनखोरी किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
ED और CBI इन टेंडरों की जांच करें।
टेंडर किसे मिले,
किन नियमों के तहत मिले,
लागत कैसे तय हुई और क्या किसी तरह का अवैध लेन-देन हुआ?
इन सभी सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
जनता के पैसे का हिसाब देना मोदी सरकार की जिम्मेदारी है।
आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाये जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाय।
@dir_ed
@CBIHeadquarters
@narendramodi
क्या प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में कमल मुरझा रहा है? “इंडिया टुडे” की रिपोर्ट पढ़िए।
indiatodayhindi.com/state/st…
ये है समाजवादी सोच, यही है PDA की भावना।
भाजपा ने सत्ता और प्रशासन के दम पर लोनी गाजियाबाद में सपा नेता अनुज प्रधान का मेधावी बेटियों को साइकिल देकर सम्मानित करने का कार्यक्रम तो रद्द करवा दिया, लेकिन बेटियों के सम्मान और उनके सपनों को नहीं रोक पाई।
अनुज प्रधान अब गांव-गांव, घर-घर जाकर उन मेधावी छात्राओं को साइकिल देकर अपना वादा निभा रहे हैं।
भाजपा ने कार्यक्रम रोका, लेकिन सेवा का संकल्प नहीं रोक पाई।
हमारा संकल्प है कि बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन बेटियों के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य से कोई समझौता नहीं हो सकता।
I.P. Singh retweeted
बिहार और उत्तर प्रदेश के MLC चुनाव में BJP/NDA के लचर प्रदर्शन के कई कारण हैं। पहला बड़ा और वाजिब कारण ओम प्रकाश राजभर ने बता दिया है। लिहाजा उसको छोड़ कर अन्य कारणों पर नजर डालते हैं :
2. डोमिनेंट OBC से भाजपा की दूरी बन जाना। आरक्षण, जाति जनगणना पर संघ-भाजपा का रवैया प्रमुख कारण है।
3. सवर्ण वोटर अब किसी पार्टी का पिछलग्गू नहीं रहा। खराब अर्थव्यवस्था, Gen Z आंदोलन, पेपर लीक, नौकरियों के अवसर का कम होता जाना, UGC प्रकरण इसकी असली वजह है। इसकी पहली झलक लोकसभा चुनावों में ही मिल गई थी जब भाजपा SC रिजर्व सीटों पर भी हारने लगी थी। याद रखिए BJP को SC रिजर्व सीटों पर तभी हार मिल सकती है जब सवर्ण और वैश्य वोटर्स की एकजुटता टूट जाए। अब अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव से उन सीटों पर सवर्णों को कोई दिक्कत नहीं जहाँ इनके उम्मीदवार सवर्ण होंगे।
4. बिहार : ऊपर गिनाई वजहों के अलावा बिहार में एक बड़ा फैक्टर और है। 1994 में वैशाली उपचुनाव में जो काम लवली आनंद की जीत ने किया था वही काम बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत ने किया है। लवली की जीत ने साफ़ कर दिया था कि 1995 के चुनावों में भाजपा सवर्णों की एकमात्र पसंद नहीं है। आनंद मोहन ने उस माहौल को संभाल लिया होता तो कहानी ही अलग होती। बहरहाल कमोबेश वही हालात PK ने भी बना दिए हैं। बिहार में PK की संभावना और कुछ नहीं बल्कि सवर्णों की भाजपा से निराशा, महादलितों की मंडल और कमंडल दोनों से निराशा और मुसलमानों की RJD से निराशा का परिणाम है। इसमें Gen Z आंदोलन भी अपना योगदान दे रहा है। जब से भाजपा ने बिहार की सत्ता की कमान अपने हाथ में ली है तबसे ऐसा लगता है कि ये पार्टी बिहार की सोशल कॉम्बिनेशन वाली पिच पर शेन वार्न की गूगली और सकलैन मुश्ताक की दूसरा के फेर में एक साथ फंस गई है।
चीन में प्राथमिक विद्यालयों के परिसर को देखिए दूसरी तरह देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में 26000 से ज्यादा विद्यालय योगी सरकार ने बन्द कर दिया।
मोदी सरकार ने शिक्षा का बजट कम कर दिया और पूरे शिक्षा का देश में बाजारीकरण कर दिया।
आज गरीब का बच्चा शिक्षा हासिल नहीं कर सकता।
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आज अयोध्या में बहन मीरा मांझी जी के आवास पर अपने समाजवादी साथियों के साथ पहुँचकर परिवार की समस्याओं एवं आर्थिक स्थिति की जानकारी ली तथा ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की। बहन मीरा मांझी जी एवं उनके परिवार को विश्वास दिलाया कि बैंक का जो भी बकाया ऋण है, उसका पूरा भुगतान कराया जाएगा। परिवार को इस आर्थिक संकट से बाहर निकालने, उनकी सभी समस्याओं का समाधान कराने और जीवन को पुनः खुशहाली एवं विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि जिस घर में देश के मा० प्रधानमंत्री जी एवं मा० मुख्यमंत्री जी पहुँचे थे और उनके घर चाय पी थी। और जिस परिवार की खुशहाली की चर्चा पूरे देश में हुई हो, आज उसी परिवार को कर्ज, आर्थिक तंगी और आजीविका के संकट से जूझना पड़ रहा है। जिस परिवार के जीवन में बदलाव लाने के बड़े-बड़े दावे किए गए हों, यदि आज वही परिवार परेशान, बेहाल और भुखमरी के कगार पर पहुँच गया है, तो यह भाजपा सरकार के उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिनमें गरीबों के जीवन में खुशहाली और विकास लाने की बात कही जाती है।
वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री जी की इस मुलाकात का मीडिया में खूब प्रचार हुआ था और परिवार के जीवन में बदलाव लाने की बड़ी-बड़ी उम्मीदें जताई गई थीं। लेकिन लगभग तीन वर्ष बाद परिवार के अनुसार उनका कारोबार नहीं चल रहा और बैंक ऋण की किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है। सवाल यह है कि क्या किसी गरीब के घर पहुँचकर चाय पी लेना और मीडिया में तस्वीरें दिखा देना ही विकास है? क्या उस परिवार को रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना शासन एवं प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
गरीबों की तकदीर बड़े-बड़े प्रचार और खोखले दावों से नहीं, बल्कि संकट के समय उनके साथ खड़े होने, वास्तविक सहायता पहुँचाने और धरातल पर ठोस कार्य करने से बदलती है। जरूरत है कि गरीब परिवारों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के वास्तविक अवसर दिए जाएँ।
इस अवसर पर महानगर उपाध्यक्ष चौधरी श्रीचंद यादव जी, प्रवक्ता श्री राकेश यादव जी (एडवोकेट), रियाज अहमद जी, श्री राजू यादव जी, श्री मोहित यादव जी, श्री युवराज यादव जी, श्री सत्येंद्र मिश्रा जी, श्री नीरज मांझी जी, श्री सूरज मांझी जी, श्री मनजीत मांझी जी, श्री अमरजीत जी, श्री राजू मांझी जी सहित पार्टी के पदाधिकारी व अन्य जन उपस्थित रहे।
@yadavakhilesh @samajwadiparty @dimpleyadav
5 करोड़ कैश जमीन के अंदर गाड़ कर रखे गये थे प्रयागराज के सूत्र बता रहे हैं कि यह पैसा CM योगी के कैबिनेट मंत्री नंदी के हैं।
बीजेपी मंत्रियों विधायकों अफसरों और इंजीनियरों ने मिल कर यूपी को जमकर लूटा है।
15 साल में जीरो से अरबपति बन गया पहले BSP में लूटा 2017 से BJP में लूट रहा है।
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डबल इंजन का डबल ज़ीरो!
#वाराणसी
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प्रिय मतदाताओं,
भाजपा एक 'फ़्लॉप शो' बन गई है।
भाजपा वाले वाराणसी में पहले ‘काउंटिंग’ में हारे, फिर दोबारा ‘री-काउंटिंग’ में हारे, मतलब दो बार मतगणना हुई और दोनों बार भाजपा और उनके संगी-साथी हारे।
ये डबल इंजन की डबल हार है।
विधान परिषद के चुनावों में भाजपा की हार ने 2027 में होने वाले उ.प्र. विधानसभा चुनाव की प्रस्तावना लिख दी है। ये एक तरफ़ भाजपा की ‘शिक्षक, शिक्षार्थी व शिक्षा’ विरोधी नीतियों की हार है, तो दूसरी तरफ़ पढ़े-लिखे ‘बेरोज़गार स्नातकों’ ने भी अपना फ़ैसला सुना दिया है।
भाजपा ने हर समाज को जिस तरह ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ किया है, उससे सभी उत्पीड़ित एक साथ आ गए हैं। पीडीए का जनाधार अब 95% हो गया है, क्योंकि ‘जो पीड़ित, वो पीडीए’!
इससे भाजपा में अस्तित्व का संकट शुरू हो गया है, क्योंकि भाजपा के अंदर तो सभी लोग जानते हैं कि जो सीटें भाजपा जीती भी है, वो भी हेराफेरी से जीती गई हैं। भाजपा की अंदरूनी फूट से डबल इंजन की टकराहट और बढ़ गई है। इसीलिए भाजपाई प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ने की हिम्मत पूरी तरह हार गए हैं। जो भाजपा अब तक प्रत्याशियों का सर्वे करा रही थी, वो अब दूरबीन लेकर प्रत्याशी ढूँढ़ रही है, पर कहीं कोई नज़र नहीं आ रहा है।
भाजपा की टिकट की खिड़की खाली है।
इस उत्साहवर्धक जीत के लिए उ.प्र. के परम आदरणीय शिक्षकगण व अपने भविष्य के लिए चिंतित युवाओं का हम हृदय से आभार प्रकट करते हैं कि उन्होंने न केवल हमें वोट दिया, बल्कि हमारे ‘पीडीए प्रहरियों’ के साथ यथासंभव निगरानी भी रखी और प्रमाणपत्र मिलने तक डटे रहे।
हम अपने सभी जीते हुए प्रत्याशियों को बधाई देते हैं और उनको भी, जिनको चालबाज़ी-जालसाज़ी से हराया गया। दरअसल हमारा कोई भी प्रत्याशी हारा नहीं है, बस वो भाजपाई हेराफेरी के आगे जीत नहीं पाया। हम उनका भी बराबर अभिनंदन करते हैं। हमारे लिए वे सब भी बिना सर्टिफ़िकेट के विजेता हैं।
यही सजगता और एकजुटता 2027 में हमारी सरकार बनाने के लिए ‘निर्णायक नींव’ बनेगी।
पुनः सभी मतदाताओं को कोटि-कोटि हार्दिक धन्यवाद!
आपका अखिलेश
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कफन बांध लिया,रोड जाम करेंगे..
यूपी के प्रयागराज शिक्षा निदेशालय परिसर में TGT-PGT शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने नई नियमावली के विरोध में कई दिनों से शांतिपूर्ण ढंग प्रदर्शन किया।आज जब प्रदर्शन करने के लिए पहुंचे तो गेट पर ताला बंद।जिससे मौजूद छात्र नाराज हो कफन बांध प्रदर्शन किया। मौके पर मौजूद यूपी पुलिस ने छात्रों को नियंत्रित किया।डीसीपी सिटी सागर जैन छात्रों को समझाते दिखाई पड़े।
प्रधानमंत्री ने अयोध्या में फोटो शूट के बाद मीरा मांझी का परिवार बर्बाद हो गया।
मोदीजी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में मीरा मांझी के घर जाकर फोटो खिंचवाई, खूब प्रचार किया और रोजगार मांगने वाली मीरा को कथित तौर पर ₹3 लाख के कर्ज में डूबा दिया।
आज उस परिवार की दुर्दशा पर न PM की कोई जवाबदेही दिखती है, न योगी सरकार की ओर से मदद की कोई ठोस पहल।
फोटोशूट के वक्त परिवार अपना था, अब संकट में कोई सुध लेने वाला नहीं।
आखिर गरीब परिवारों को प्रचार का चेहरा बनाकर उनके हाल पर छोड़ देना ही भाजपा की राजनीति है? प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बताएं—मीरा मांझी के परिवार को इस संकट से निकालने के लिए क्या किया गया?
उत्तर प्रदेश की महान जनता बेसब्री से बीजेपी के जाने का एक एक पल इन्तेजार कर रही है।
#MLC चुनाव एवं उसके परिणामो की पहले कभी इतनी चर्चा नहीं हुई जितनी इस बार हुईं।सबसे अधिक उत्सुकता इन चुनाव परिणामों के 4 महीने बाद होने वाले #उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों पर होने वाले प्रभावों की है तो जान लीजिए-
1-#भाजपा की लगातार जीत को लेकर मीडिया में #भाजपा_संघ संगठन को जीत की मशीन (winning machine) प्रचारित किया जाता रहा है।
चुनाव परिणामों ने इस धारणा को तोड़ा है और स्पष्ट कर दिया है कि समाजवादी पार्टी ने संगठन का ऐसा तंत्र स्थापित कर लिया है जो किसी भी कैडर आधारित पार्टी को टक्कर दे सकता है।
2-#समाजवादी_पार्टी के बारे में धारणा बनाई गई थी कि यह गुंडों-अपराधियों की पार्टी है और शिक्षित समाज (शहरी वर्ग) की पार्टी भाजपा है।
चुनाव परिणामों ने इस धारणा को ध्वस्त किया है उसने स्पष्ट कर दिया है कि सपा किसान-मजदूर के साथ-साथ शिक्षित वर्ग की भी पार्टी है।
3- लोकसभा चुनाव-2024 में समाजवादी पार्टी को मिला जनसमर्थन पिछले 2 वर्षों में और बढ़ा है तथा उसका क्षेत्रीय विस्तार हुआ है।
4-बेरोजगारी को लेकर युवाओं में और सेवा शर्तों को लेकर शिक्षकों में भाजपा से नाराजगी है।
5-चुनाव आयोग पर जनांदोलनों का असर हुआ है,जिसका प्रभाव इन चुनावों में कई जगह दिखाई दिया।
6-उप्र की प्रशासनिक मशीनरी को सत्ता परिवर्तन का संदेश चला गया है।
7-समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी द्वारा जीत के जुलूस पर रोक लगाने का संदेश देकर पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा की चुनावी रणनीति क्या रहेगी।
8-GenZ आंदोलन ने भाजपा के डर की समाप्ति का जो संदेश दिया था,मतगणना केंद्र पर उमड़ी समाजवादियों की भीड़ ने उस पर मुहर लगा दी है।
9-उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनाव सपा और भाजपा के गठबंधन #INDIA और #NDA के बीच द्विध्रुवीय (bipolar) होगा,अन्य दल हाशिये (fringe) पर रहेंगे।
#भाजपा के तीसरी बार सरकार बनाने का मिथक MLC चुनाव परिणामों से टूट गया है।
श्रीमती पूजा वर्मा जी कितने दिन तुम समाजवादी पार्टी में रही हो?
स्वर्गीय राजू पाल की आत्मा तुम्हें धितत्कारती होगी जो तुमने दूसरा घर बसा लिया और राजनीति उनके नाम पर करती हो।
सपा में चुनाव जीतने आयी थी आगे अब कभी विधायक नही बन सकती।
लखनऊ: MLC चुनाव के परिणाम पर बोलीं पूजा पाल
"2027 में बीजेपी की सरकार बनेगी, सपा वाले बहुत थोड़े में खुश हो जाते हैं। ‘जिसको जो सही लगा उसने वहां वोट किया’ , ‘आज भी लोग सीएम योगी पर भरोसा करते हैं।’"
#Lucknow #PoojaPal #UPPolitics @poojaplofficial
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मोदी जी वाराणसी में बुरी तरह हार चुके हैं फिर भी बेईमानी करने में जुटे हैं रिकाउंटिंग भी करा ली उसमें भी हार गए।
जानकारी मिली है कि @samajwadiparty के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा 16990 वोट से जीत चुके हैं ज्ञानू जीत का प्रमाण पत्र दो तुम्हारे आका हार चुके हैं। @ECISVEEP
अपने संसदीय क्षेत्र की सीट हार कर #ट्रोलिंग_गुरु बनने के लिए मोदी जी जैसा 56 इंच का सीना चाहिए।
I.P. Singh retweeted
ये मीरा माँझी हैं।
अयोध्या में प्रधानमंत्री मोदी इनके घर पहुंचे थे।
चाय पी थी।
वे घर के भीतर थे, योगी आदित्यनाथ दरवाजे पर थे।
आज बहुत ही विपन्न हालातों में हैं।
बड़ी मुश्किल से दौड़ धूप करके जो सरकारी कर्जा मिला था, उसे चुकाने के लिए पाई-पाई की मोहताज हैं।
घर बर्बादी के कगार पर है।
किसी ने सुध नहीं ली, किसी ने पूछा नहीं, किसी ने याद भी नहीं रखा कि मीरा मांझी कौन हैं?
अब समाजवादी पार्टी के पवन पांडे पहुंचे हैं। पचास हजार की मदद दे रहे हैं। एक हफ्ते में कर्ज माफ कराने का वादा कर रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ की सरकार में सात हजार करोड़ की जयजयकार हो सकती है।
मगर मीरा मांझी के लोन के 3 लाख रुपये का प्रबंध नहीं हो सकता!!
यही इस दौर की असली तस्वीर है।
मौसम बेमिसाल बेनजीर है!!


















