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This 6kka generation does not burst firecrackers. Gen Z and Gen Alpha. A lot of my favourite childhood memories as a little boy was walking around like a commando with a bag full of explosives especially blowing up that green bomb. Diwali should sound like AKs going off for 5 days. It did until a decade ago.
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करपात्री जी के खंडन के क्रम में षष्ठ पुष्प की प्रकाशन-पूर्व प्रति प्रस्तुत है, जो ९९ पृष्ठों में सैकड़ों प्रमाणों से युक्त है। कवष ऐलूष के विषय में करपात्री जी का असत्यमूलक मत मीमांसा, व्याकरण, न्याय, धर्मशास्त्र आदि अनेक विद्यास्थानों का उल्लंघन करता है।
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धीरेन्द्र शास्त्री @bageshwardham से निजी खुन्नस है तो बात अलग है लेकिन क्या वो पहले कथावाचक हैं जिन्होंने कन्हैया को टेढ़ा कहा? सभी ये मानते हैं कि राम जिन मर्यादाओं में बंधे रहे, कन्हैया उन सब से स्वतंत्र रहे। उनका नाम त्रिभंगीलाल है मतलब तीन जगह से टेढ़े।
रविन्द्र जैन को सुनिए
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जय श्री कृष्ण
बांके बिहारी का अर्थ टेढ़ा बिहारी ही हम त्रिभंगी का अर्थ भी यही है। श्रीठाकुरजी महाराज 3 जगह से शरीर को मोड़कर खड़े होते हैं बंसी बजाते हुए उसे त्रिभंगी मुद्रा कहते हैं। और भगवान् श्रीकृष्ण टेढ़े ठाकुर हैं ये भला कौन नहीं जानता? धर्म के लिए किसी भी हद के टेढ़ेपन का विनियोग भगवान् करते हैं धर्म की रक्षा हेतु। भगवान ने छलों में स्वयं को द्यूत कहा है। भगवान् से आत्मीय सम्बन्ध रखने वाले भक्त यह सब समझते हैं। सीधे खड़े हुए भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति बहुत ही कम मंदिरों में होती है। जबकि भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम रूप में हैं और उनकी सभी मूर्ति सीधे खड़े हुए ही होती हैं।
भगवान् श्रीराम और भगवान श्री कृष्ण में तत्त्वतः अभेद होते हुए भी लीला व स्वरूप का भेद है, इस अन्यता में वस्तुतः अनन्यता ही है। इसे थोड़ा ऐसे समझ सकते हैं,
काल की आवश्यकता के अनुसार भगवान् का अवतार ग्रहण होता है। भगवान् श्री राम धर्मावतार हैं और भगवान् श्रीकृष्ण आध्यात्मावतार हैं।
भगवान् श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और भगवान्श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम हैं।
धर्मावतार के कारण श्रीराम का हर कार्य एकदम स्पष्ट और आँख मूँद कर अनुकरणीय है, क्योंकि लोकशिक्षण के लिए भगवान् ने धर्म को ही अपने कर्म व चरित्र में प्रकट कर दिया, और आध्यात्मावतार के कारण श्रीकृष्ण की लीलाएं समझना बिना भक्ति, श्रद्धा और निर्मल मन के नहीं बन सकता।
श्री राम साक्षात् धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं, मानो वेदवर्णित सारा धर्म भगवान में आविर्भूत हो गया, सरल मानव मन के सारे संशय क्षण में छिन्न भिन्न करने वाला। वेदव्यास जी कहते हैं, "मर्त्यावतारस्त्विह मर्त्यशिक्षणं..." श्री राम का अवतार मानव जीवन कैसा होना चाहिए, यह बताने के लिए विशेष हुआ।
श्रीकृष्ण का चरित्र लीला वैचित्र्य से भरा हुआ है, उनकी लीलाओं की विरोधाभासिता में निगूढ़ रहस्य भरा है। परन्तु रज और तम गुण उन्हें छू भी नहीं गया है, उनका प्रत्येक कर्म विशुद्ध सत्त्व है, शुद्ध उच्च आध्यात्म है, वेदों का निगूढ़ रहस्य है।
संसार के इतिहास का सारा का सारा धार्मिक व्याख्यान भगवान श्रीराम के जीवन में पर्यवसित होता है।
संसार के इतिहास का सारा का सारा आध्यात्मिक व्याख्यान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में पर्यवसित होता है।
भगवान् श्रीराम अपनी भगवत्ता की घोषणा नहीं करते, फिर भी उनके मनुष्य रूप में धर्म आचरण से ही वह प्रकट हो जाता है और सभी ऋषि मुनि भक्त उनमें भगवान् का दर्शन करते हैं। जबकि भगवान् श्रीकृष्ण के चरित्र में जन्म से ही कारागृह से आगमन, छकड़ा उलटना, पूतना वध आदि से महान आश्चर्यजनक घटनाओं की झड़ी लग जाती है, वे अपनी इस अलौकिक भगवत्ता को कभी गोपनीय नहीं करते अपितु इसकी घोषणा कर विराट स्वरूप भी दिखा देते हैं।
पर तत्त्वतः श्री राम ही कृष्ण हैं और श्री कृष्ण ही राम हैं।
उपरोक्त बातों पर चिंतन करें। श्रीभगवान् अनन्तकोटिब्रह्माण्डनायक हैं, सर्वशक्तिमान, सर्वाधार, सर्वान्तर्यामी हैं, उनको अपने बित्ती भर दिमाग की कोठरी में बाँधने की चेष्टा न करें।
श्रीराम रूप में भगवान ने हमारे लिए अनुकरणीय सब बता दिया है, फिर भक्तकारुण्यवश हमारे कल्याण के लिए ही श्रीकृष्ण ने गीता को प्रकट किया। इसलिए रामायण के अनुसार जीवन जीकर गीता के अनुसार उसको प्राप्त करें। श्री राम के जीवन को धर्म में और श्री कृष्ण के जीवन को अध्यात्म में पाथेय बनाएं।
जय श्री राम
जय श्री कृष्ण
―― @MuditUpdates
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ऐसा कई बार हुआ है कि प्रकृति स्वयं ही मोदी जी का साथ देती है!
2014 का यह एक फोटो देखिए जब बनारस में हवा ने भाजपा का बैनर उड़ा दिया पर हवा ने मोदीजी का साथ दिया थामे रखा।...
एक दूसरा फोटो भी है जब मोदीजी का बैनर आंधी में नहीं उड़ा। ऐसे पता नहीं कितने वाकये हैं। 2014 के पहले भारत में पुतला फूंकने की राजनीति बहुत होती थी। पर कांग्रेसियों ने शायद 2-3 बार मोदीजी का पुतला फूंकने की कोशिश की, हर बार फूंकने वाला ही आग की चपेट में आ गया। इसके बाद पुतला फूंकने की राजनीति लगभग खत्म हो गई। इस पर ये लाइनें सही बैठती हैं!...
जब "विपक्ष" चले तो साया भी अपना न साथ दे
जब मोदी चले तो जमीं चले .आसमां चले !
नेता मीडिया और जनता की क्या बात करें
सारा ज़माना चले तूफ़ान चले, फ़िज़ा चले !
इरादा हो अटल तो मो'जिजः ऐसा भी होता है।
दिए को ज़िंदा रखती है हवा, ऐसा भी होता है। ❤️
#मोदी_कहीं_नहीं_जाएगा
@MuditUpdates मैने ले लिया भाई सा आपका लेख....🙏🫶👌
#RamlilaMaidan
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A veritable sea of humanity came to hear @narendramodi - breath-taking picture.
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KGMU लव जिहाद कांड पर STF की जांच में बड़ा खुलासा :-
मेडिकल यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसर लव जिहाद के नेक्सस में सहयोगी थे।
कई समुदाय विशेष के डॉक्टर हिन्दू महिला डाक्टरों को फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन करने में लगे थे।
एक मुस्लिम चिकित्सक ने लव जिहाद पीड़िता से कबूला था कि उसने कुल 19 हिन्दू ल़डकियों का बलात्कार किया है।
KGMU के कई महिला चिकित्सकों पर डोरे डालने के प्रयास चल रहे थे।
इसी तरह गांधी वार्ड के 2 समुदाय विशेष के कर्मचारी भी नर्सिंग स्टाफ को मुसलमान बनाने में लगा हुआ पाया गया है।
STF ने KGMU प्रशासन से इस गिरोह में शामिल लोगों पर कार्रवाई करने को कहा है।
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ये बकलोल खुद ही लिख रहा है "छद्म संत निंदकों..." अब वाक्य विन्यास क्रम के अनुसार या तो जिसकी निंदा हो रही है, वो स्वयं "छद्म संत" है, यानी कि निंदा के योग्य ही है, या फिर "संत निंदक" ही "छद्म" है, मतलब फिर तो इसके हिसाब से कोई निंदा ही नहीं हुई। 😂
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FRAUD “JAGADGURU” @Nigrahacharya
-Stop UPI BEGGING, come out in society & work for money .
- students study hard , take loans, take parents help and go to US / Canada .
-don’t act like your family has sponsored them , so that we are obliged to listen to you blabbering.
Replying to @Akashbharadwaj3
When we question his BOGUS narratives , his lies - he will attack us with “videshgami” . If he warned even 1000 Rs working hard , he will know the value of money and not talk like a FOOL this way .UPI scan begging is what he has been doing- so he doesn’t know the value of money
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Replying to @UJJAVALSHAH2
Stop spreading anti-Jain propaganda in the name of history. Making unproven claims about Jains and presenting them as facts is dishonest and irresponsible.
Vallabhi was an important centre of Jain learning. Your claim that a Jain merchant invited invaders to destroy it is a serious allegation. Where is the solid evidence? Where are the reliable historical records?
You cannot twist history and spread fake news. If you have genuine evidence show it. If not stop misleading people.
Our history deserves facts not false claims and hateful narratives. Speak with evidence not prejudice. Stop using history to spread hatred against Jains.
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संदेश
स्व० श्री केदारनाथ साहनी जी भारतीय जन संघ के उन कार्यकर्ता में से थे, जिन्होंने काश्मीर आंदोलन सफलता के लिए बहुमूल्य योगदान किया था और एक प्रकार से वह जन संघ की स्थापना के समय से ही डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में हुए काश्मीर आंदोलन के लिए प्रमुख भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं में से एक थे। वह इस प्रकार पार्टी के जन्म के समय से और अंतिम समय तक पार्टी के मूल सिद्धांतों के प्रति पूर्ण निष्ठा के साथ समर्पित रहे।
मेरा उनसे पहला परिचय 1953 के लगभग हुआ था और जीवन पर्यंत उनके साथ वैसा ही घनिष्ठ बना रहा। उन्होंने भारतीय जनसंघ तथा बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण और विकास में बहुमूल्य योगदान किया और विभिन्न पदों को भी सुशोभित किया। उन्होंने दिल्ली के महापौर एवं अन्य प्रशासनिक पदों को सुशोभित किया। ऑर्गनाइजर / पांचजन्य समूह के प्रबंधक निदेशक के तौर पर स्व० मलकानी जी जैसे मूर्धन्य संपादक के साथ काम किया।
काश्मीर में जब हिंदुओं का संहार किया जा रहा था, मंदिरों पर आघात किया जा रहा था और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा था, तब मेरी अध्यक्षता में बनी एक समिति में सदस्य के रूप में श्री आरिफ बेग को साथ लेकर उन्होंने सारे काश्मीर के उपद्रव ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया और ऐसी रिपोर्ट बनवाने में प्रमुख भूमिका अदा की, जिसके बाद देश को काश्मीर की असली वस्तुस्थिति का पता चला।
श्री केदारनाथ साहनी जी का ही प्रयास था कि काश्मीर के लाल चौक पर झंडा फहराने के लिए मैं सफल हो पाया। उन्होंने ही दिल्ली में बैठकर ही केंद्र की सरकार को विवश किया जिससे हमें जहाज उपलब्ध हो सका और हम सब श्रीनगर पहुंच पाए।
वह एक अत्यंत सिद्धांतवादी, प्रामाणिक, संचरित, निष्ठावान नेता थे। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा। आज उन जैसे तपस्वी राजनीतिज्ञों कि बहुत आवश्यकता है। जिसका अभाव पूरा करना बहुत कठिन है।
मैं उनके श्री चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।










































