भारतीय हूँ जिसकी,केवल एकमात्र इच्छा कि देशके लिए पीढ़ियों को समर्पित योगदान दे सकूं!❤😊❣🙏 आप यहाँ पठनिय की उम्मीद कर सकते है,लीक से हटकर,स्वरचित भी अज्ञात भी!

जम्बू द्विपे!
Joined September 2021
प्रिय साथियों कभी-कभी कुछ संगीत, केवल कानों से नहीं सुना जाता, वह सीधे आत्मा तक पहुँचता है। मेरे लिए यह अद्भुत धुन ऐसी ही एक दिव्य अनुभूति है। जब यह स्वर-लहरियाँ पियानो और अन्य तारों से निकलती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो कैलाश की हिमाच्छादित चोटियों पर स्वयं भगवान शिव समाधि में लीन हों और उनकी नाद का निनाद..ध्वनि सूक्ष्म रूप धारण कर संगीत बनकर ब्रह्माण्ड में प्रवाहित हो रही हो। प्रत्येक सुर हृदय की थकान को हर लेता है, मन के विक्षोभ को शांत करता है और आत्मा को एक नई ऊर्जा से भर देता है। जीवन की भाग-दौड़, तनाव, चिंताएँ और मानसिक कोलाहल के बीच यह संगीत मेरे लिए किसी औषधि से कम नहीं। मेरी तो पूरी शृंखला ही सुनने लायक है! इसे सुनते समय अनेक बार मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मन एक ऐसी अलौकिक शांति का अनुभव करता है जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है!! मैं आप सभी से स्नेहिल आग्रह करता हूँ कि जीवन में कम-से-कम एक बार इस संगीत को अवश्य सुनें। इसे केवल सुनिए मत, स्वयं को इसके हवाले कर दीजिए। और यदि संभव हो तो अच्छे हेडफ़ोन लगाकर, आँखें बंद करके, कुछ मिनटों के लिए संसार की समस्त चिंताओं से मुक्त होकर इसे सुनिए। तब आप पाएँगे कि संगीत केवल ध्वनि नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा आत्मा को स्पर्श करने का एक माध्यम है। हो सकता है कि यह धुन आपको भी उसी दिव्य अनुभूति से भर दे, जिसका अनुभव मैं हर बार करता हूँ एक ऐसी अनुभूति जहाँ मन शांत हो जाता है, हृदय निर्मल हो जाता है और आत्मा भगवान शिव के चरणों के निकट पहुँच जाती है। हर हर महादेव। 🕉️ 1/5
Replying to @TriShool_Achuk
Eye closed! Mind and Ear opened!!! Brain Sleeping!!! It's miracles of "PIANO" कभी सुना था??? सवाल ही नहीं उठता !!! आखिर किसी ने तो बजाया होगा!! कौन?? आख़िर कौन है वो जादूगर?? कुछ पता चला?? 2/5
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काँग्रेस के ऊंचे ऊंचे कलाकार
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एक गांधर खोद की अतृप्त इच्छायें @rautsanjay61
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ये थे अखिलेश यादव
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साथियों ये रील की जन्मदात्री या रचयिता, ये है 👇👇👇 @aditiminglani सोचा रियल सोर्स आपको ज्ञात होना चाहिए !
और Starlink क्या है आखिर!
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तैयारी तो इनकी है ही @CPDelhi @dgpup
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चईये भारत में कम्युनिस्ट? चईये भारत में JNU वाले? चईये छूश्लिम ? तो जाओ मैंलाओ अराजकता !
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🚩🕉️🇮🇳 जब आजम खान ने झल्लाते हुए कहा इसके लिए पैसा दाऊद, तालिबान और अबू सलेम ने दिया है....। बात मुलायम सिंह जी यादव के 75 वें जन्मदिन 2015 की है, 21 और 22 नवंबर के दिन रामपुर को फूलों और विद्युत की रोशनी से सजा दिया गया था, नेता जी के जन्मदिन मनाने के लिए लंदन से विक्टोरियल बग्घी मंगाई गई थी, जो की 5 करोड़ में आई थी । इसी बग्घी पर बैठ कर मुलायम सिंह, उनके पुत्र और आजम खान पूरे शहर में अपने 50 लग्जरी गाड़ियों के काफिले और अपने पूरे मंत्रियों के साथ घूमे और जौहर विश्वविद्यालय में करीब 75 फुट का केक काट कर उनका शाही जन्मदिन मनाया गया....। इसी शाही खर्चे को लेकर जब पत्रकारों ने आजम खान से पूछा कि जन्मदिन मनाने के लिए इतना सारा पैसा कहां से आया तो आजम खान ने झल्लाते हुए कहा इसके लिए पैसा दाऊद, अबू सलेम, और तालिबान ने दिया है... जनता के पैसों पर ऐयाशी करने वाले ये नेता सिर्फ नाम के लोहिया वादी हैं....। एक ये मुख्यमंत्री थे जो 50 करोड़ में जन्मदिन मनाते थे और एक योगी जी हैं जो अपना जन्मदिन हर साल 50 रुपए का पौधा लगा कर मनाते हैं..। यही अंतर है कथित फर्जी लोहियावादी और संघी सीएम में....
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और अम्बानी केवल धंधा कर्ता है! तुम्हारी आं की शहतूत में गिल्ली
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और मोदी का विरोध करना है.. और मोदी वोट चोरी कर्ता है.... तुम्हारी आं की शहतूत
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भले ही मोदी के पास हार्वर्ड या कैंब्रिज की डिग्री ना हो, लेकिन मोदी की कार्यकुशलता को आप नकार नहीं सकते। युद्ध के दौर में भी मोदी ने देश की ऊर्जा व्यवस्था को स्थिर रखा है ये हमें नहीं भूलना चाहिए। यह कूटनीतिक सफलता एक अध्ययन का विषय है
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एक ही चीज़ है जिसे उन्होंने नहीं लुटा
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वो कौन थे और है जो कौंग्रेस और स्पा को सपोर्ट करते थे...
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ये सबको मालूम होना चाहिए
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हमारी स्मरणशक्ति बहुत अल्प है! @Dev_Fadnavis भाऊ पर उँगली उठाने से पहले, आइए कुछ क्षण ठहरकर स्मरण करें कि वे कौन हैं, किन सिद्धांतों के लिए अडिग रहे हैं और महाराष्ट्र, भाजपा, राष्ट्र, धर्म तथा हिंदुत्व के लिए उन्होंने क्या-क्या किया है। वे ऐसे नेता हैं, जो राजनीतिक कीमत चुकाने की स्थिति में भी अपनी विचारधारा पर दृढ़तापूर्वक अडिग रहे हैं। ऐसे नेता, जिन्होंने भाजपा को सशक्त बनाने के लिए कार्य किया, हिंदुत्व का ध्वज बुलंद किया, हिंदू हितों के पक्ष में दृढ़ता से खड़े रहे और सदैव इस महत्त्व को स्वीकार किया कि सबसे छोटे जमीनी कार्यकर्ता से लेकर सर्वोच्च पद पर आसीन नेता तक, प्रत्येक कार्यकर्ता का अपना महत्त्व है। राजनीति का मूल्यांकन किसी एक वक्तव्य, एक निर्णय अथवा मतभेद के किसी एक क्षण के आधार पर नहीं किया जा सकता। किसी नेता के योगदान का आकलन उसके वर्षों के समर्पण, धरातल पर किए गए कार्यों, वैचारिक प्रतिबद्धता और सबसे अधिक दबाव की परिस्थितियों में भी दृढ़ रहने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए। जब भावनाएँ उफान पर हों, तब आलोचना करना सरल होता है। जब वर्तमान हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप न हो, तब अतीत को भुला देना उससे भी अधिक सरल होता है। किंतु जो लोग वास्तव में किसी विचारधारा में विश्वास रखते हैं, उनमें इतना विवेक और परिपक्वता अवश्य होनी चाहिए कि वे रचनात्मक आलोचना और उस व्यक्ति को अनुचित रूप से निशाना बनाने के बीच अंतर कर सकें, जिसने उसी उद्देश्य के लिए वर्षों तक अपना जीवन समर्पित किया हो। देवेंद्र फडणवीस भाऊ का समर्थन करने का अर्थ यह नहीं है कि हम मानते हैं कि किसी नेता से कभी प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए। इसका अर्थ है उनके योगदान को निष्पक्षता से स्वीकार करने का भाव, अन्यायपूर्ण आलोचना के समय उनके साथ खड़े रहने की वैचारिक दृढ़ता और उन्हें चुनिंदा आख्यानों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके संपूर्ण कार्यकाल एवं योगदान के आधार पर परखने का विवेक। राष्ट्र, धर्म, भाजपा और हिंदुत्व के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अस्थायी मतभेदों और क्षणिक आक्रोश से कहीं अधिक व्यापक होनी चाहिए। हमें उन नेताओं को कभी नहीं भूलना चाहिए, जो विचारधारा के साथ दृढ़तापूर्वक खड़े रहे हैं, और उन कार्यकर्ताओं को भी, जिन्होंने इस आंदोलन को धरातल से उठाकर खड़ा किया है। विचारधाराओं की रक्षा सुविधानुसार नहीं की जाती और निष्ठा केवल तभी सिद्ध नहीं होती, जब सब कुछ अनुकूल चल रहा हो। निष्ठा की वास्तविक परीक्षा तब होती है, जब अपने सिद्धांतों के साथ खड़े रहना कठिन हो जाता है। देवेंद्र फडणवीस भाऊ इस बात के अधिकारी हैं कि उनका मूल्यांकन निष्पक्षता से किया जाए, उनके कार्यों को स्मरण रखा जाए और महाराष्ट्र, भाजपा, हिंदुत्व तथा आंदोलन के साथ खड़े रहने वाले प्रत्येक कार्यकर्ता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का सम्मान किया जाए। उनके कार्यों को स्मरण रखें। उनके समर्पण का सम्मान करें। क्षणिक और चयनात्मक आक्रोश को कभी भी व्यापक सत्य पर पर्दा डालने न दें। जय श्री राम! 🙏🏻
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अब जापान में भी सेम प्रोटेस्ट शुरू हो गया है। चाहे फ्रांस हो, इटली हो, स्पेन हो, इंग्लैंड हो, अल्बानिया हो (जहाँ की सुप्रीम कोर्ट को कल फूँक दिया गया), जापान हो या भारत हो एक चीज़ हर जगह कॉमन है, और वो है फिलिस्तीन का झंडा। • पीसा की मीनार पर फिलिस्तीन का झंडा। • एफिल टावर पर फिलिस्तीन का झंडा। • चर्च पर फिलिस्तीन का झंडा। • टाउन हॉल पर फिलिस्तीन का झंडा। • इंग्लैंड की सड़कों पर फिलिस्तीन का झंडा। • जंतर-मंतर पर फिलिस्तीन का झंडा। • प्रियंका वाड्रा के बैग पर फिलिस्तीन का झंडा। • भारत की संसद में "जय फिलिस्तीन"। अब तो सबकी समझ में आ जाना चाहिए कि CAA कितना ज़रूरी था। और ये भी सबकी समझ में आ जाना चाहिए कि ये कोई स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट नहीं है। जय श्रीराम 🙏🏻🚩
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जली गाँव वाला एक तड़पता गांधर खोद
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आइए आंदोलन जीवि से मिलवाऊं
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इससे ज्यादा बुरी तरह से और क्या कोई राहुल की लेगा 😂😂
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ये कौन सी बड़ी बात है
तो क्या हुआ मोदी ने किया ही क्या है.... आप ऐसा कहने वालों को कुछ कहना चाहेंगे?
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तो क्या हुआ मोदी ने किया ही क्या है.... आप ऐसा कहने वालों को कुछ कहना चाहेंगे?
अब कुछ झोपड़ी वाले बोलेंगे ये AI से बनाया है....तो जा झोपड़ी के नेट पर देख ले @grok से पूछ ले...
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