करवा चौथ की शुभकामनाएं, दोस्तों! 🌕❤️
ऑफिशियल वाले, अनऑफिशियल वाले... सबको शुभकामनाएं!
जिस तरह से सेशन करते हुए खांसी हुई थी, थोड़ी देर के लिए तो लगा कि करवा चौथ में चीटिंग हो गई है! 🤭
युगकवि से पहले आदरणीय भी! 🙃
आदरणीय युगकवि @DrKumarVishwas की रचना पर प्रश्नचिह्न उठाने का साहस करने वाले, @ajeetbharti @manojmuntashir पहले यह तो बताइए कि महाप्राण निराला की ‘राम की शक्ति-पूजा’ से लेकर रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ‘रश्मिरथी’ तक, क्या आपने कभी काव्य की उस ऊँचाई को स्पर्श किया है, जहाँ शब्द केवल शब्द नहीं रहते, युग की चेतना बन जाते हैं?
‘मंगल रंग’ जैसे गीत की आलोचना करने से पहले उसके भावबोध, सांस्कृतिक चेतना और काव्यात्मक अभिव्यक्ति को समझने का प्रयास कीजिए। किसी रचना से असहमति आपका अधिकार है, किंतु अपनी रुचि को ही साहित्य का अंतिम प्रतिमान मान लेना और एक युगकवि की सृजनशीलता पर प्रश्न उठाना आपकी सीमित दृष्टि का परिचायक है।
राष्ट्र, संस्कृति और आस्था के भावों को गीत में पिरोने का प्रयास हो, तो उसका मूल्यांकन भी समग्रता में होना चाहिए, न कि पूर्वाग्रह के चश्मे से।
महाप्राण दिनकर की ‘रश्मिरथी’ में कर्ण की हुंकार देखिए—
“याचना नहीं, अब रण होगा,
जीवन-जय या कि मरण होगा।
टकराएँगे नक्षत्र-निकर, बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर,
फण शेषनाग का डोलेगा, विकराल काल मुँह खोलेगा।
दुर्योधन! रण ऐसा होगा। फिर कभी नहीं जैसा होगा।”
इन पंक्तियों की शक्ति केवल शब्दों में नहीं, उस भावभूमि में है जो शब्दों को युगध्वनि बना देती है। ठीक इसी प्रकार ‘मंगल रंग’ का मूल्यांकन भी उसके संपूर्ण भाव, संदर्भ और अभिव्यक्ति के आधार पर होना चाहिए।
आदरणीय युगकवि डॉ. कुमार विश्वास जी,
की लेखनी पर प्रश्न उठाने से पहले, अपनी आलोचना की पात्रता तो सिद्ध कीजिए!
काव्य का मूल्यांकन तर्क से होता है, अहंकार से नहीं; और साहित्य में प्रतिष्ठा शोर मचाने से नहीं, सृजन से अर्जित होती है। आलोचना कीजिए, अवश्य कीजिए—पर इतनी उदारता और साहित्यिक विवेक के साथ कि असहमति के बीच भी सृजन का सम्मान बना रहे।
#कुमारविश्वास #मंगलरंग #रश्मिरथी
@Shivangkaushik3
अपने कोर प्रिंसिपल्स से केवल राजनीतिक पार्टियां और नेता ही पलटी नहीं मारते, apple जैसी कंपनियां भी पलटी मारती हैं।
अब लैपटॉप में हॉरिजॉन्टल टचस्क्रीन के इस्तेमाल को लेकर कंपनी स्टीव जॉब्स के विचार सुनिए।
और अब apple ने टचस्क्रीन से लैस अपना लेटेस्ट MacBook Pro लॉन्च किया है।
इजरायल में हुए आम चुनाव के वोटों की गिनती जारी है।
अरब पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। दक्षिणपंथी पार्टियों के साथ उनका गठबंधन बढ़त बनाए हुए है, लेकिन बहुमत अभी दूर है।
अब तक 85.6% मतों की गिनती हो चुकी है।
नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को 53 सीटें मिलती दिख रही हैं।
पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें, जबकि अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलती दिख रही हैं।
इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत जरूरी है।
इस बीच नेतन्याहू ने दक्षिणपंथी दलों की निर्णायक जीत का दावा करते हुए राष्ट्रीय दक्षिणपंथी सरकार बनाने की अपील की है।
हालांकि, अंतिम नतीजे अभी बाकी हैं।
indianexpress.com/article/wo…
इसमें बॉलर का दोष नहीं है दोस्तों, सामने एक धाकड़ बैटर को देखकर लाइन-लेंथ से भटक जाना सामान्य बात है।
इसका कोई दूसरा विकल्प जरूर तलाशना चाहिए।
ट्रेन में लगातार नेटवर्क आने-जाने और रोमिंग की वजह से मोबाइल की बैटरी ज्यादा ड्रेन होती है।
बहुत-सी ट्रेनें सुबह 6-7 बजे ही अपने गंतव्य पर पहुंचती हैं। यात्री रात में मोबाइल चार्जिंग पर लगाकर सोते हैं, ताकि सुबह उतरते समय फोन चार्ज रहे।
यह भी संभव नहीं है कि सभी यात्री रात 11 बजे से पहले अपने मोबाइल फुल चार्ज कर लें। अब जब चार्जिंग का समय निश्चित किया जा रहा है, तो जाहिर है कि तमाम यात्री एक ही समय में फोन चार्ज करना चाहेंगे।
स्टेशन से कैब बुक करने, अपने परिचितों को सूचित करने से लेकर रास्ता देखने और पता ढूंढने तक, तमाम जरूरी काम अब मोबाइल से ही होते हैं।
ऐसे में रातभर चार्जिंग बंद रखना यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ट्रेनों के कोच में मोबाइल चार्जिंग पॉइंट बंद रखने के निर्देश दिए हैं। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को इस नियम का सख्ती से पालन कराने को कहा है। यह कदम दक्षिण पूर्व रेलवे में चार्जिंग के दौरान एक यात्री के पावर बैंक से धुआं निकलने और उसमें धमाका होने की घटना के बाद उठाया गया है। निर्देशों के मुताबिक, ऑनबोर्ड स्टाफ को तय समय पर चार्जिंग पॉइंट बंद करने होंगे। अधिकारियों को औचक निरीक्षण करने और कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए हैं। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस नियम में कोई अपवाद नहीं होगा।
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इजरायल में आज आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अब तक वोटर टर्नआउट अच्छा रहा है।
इजरायल की संसद 'नेसेट' की सभी 120 सीटों के लिए मतदान हो रहा है।
7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और उसके बाद पश्चिम एशिया में हुए कई संघर्षों के बाद इजरायल में यह पहला आम चुनाव है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए इस चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है।
मुकाबला मुख्य रूप से नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच है।
Ankit Kumar Avasthi retweeted
सोशल मीडिया के सिस्टम को समझने के लिए अंकित कुमार अवस्थी जी को सुनिए
साफ़ और स्पष्ट
सही बात
सही तर्क
और सही तरफ से आई है
ब्राजील में चौथी बार लूला दा सिल्वा की सरकार!!
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अपना करिश्मा बरकरार रखते हुए राष्ट्रपति चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
दूसरे दौर के मुकाबले में उन्होंने दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर रिकॉर्ड चौथी बार राष्ट्रपति चुने जाने का इतिहास रचा है।
लूला को 51.8% और बोल्सोनारो को 48.2% वोट मिले। दोनों के बीच करीब 44 लाख वोटों का अंतर रहा।
डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक, करीब 81 वर्षीय लूला की यह जीत लैटिन अमेरिका की राजनीति में भी महत्वपूर्ण है। हाल के चुनावों में इस क्षेत्र के कई देशों में ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी नेताओं का प्रभाव बढ़ा है। ऐसे में लूला की जीत इस रुझान के विपरीत है और इसे लैटिन अमेरिका में ट्रंप के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के लिए एक झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है।
Brazil election: Lula vows to govern for all after comeback win - News
विश्व व्यवस्था अभूतपूर्व गति से बदल रही है। शायद इतिहास में पहले कभी इतने कम समय में वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन में इतने बड़े बदलाव एक साथ नहीं हुए।
यूरोप के कई देश बड़े विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहे हैं। पश्चिम एशिया एक के बाद एक संघर्षों का गवाह बन रहा है। चीन के साथ भारत के रिश्ते ऐसे दौर में हैं, जहां सहयोग की जरूरत भी है और सतर्कता की मजबूरी भी। दूसरी ओर, ट्रंप का अप्रत्याशित रवैया इस पूरी हलचल को और बढ़ा रहा है। कोई नहीं जानता कि उनका अगला कदम क्या होगा।
एक बिल्कुल नया वर्ल्ड ऑर्डर आकार ले रहा है। ऐसे में इस रंग बदलती दुनिया में भारत के सामने क्या चुनौतियां हैं और कौन-से नए अवसर उभर रहे हैं?
इन्हीं सब विषयों पर आज भोपाल में @epanchjanya द्वारा आयोजित सुशासन संवाद 3.0 में चर्चा करने का अवसर मिला।















