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Ex Editor - https://teapawt.org/t.co/BUOcgjCcnq Ex @News18 @BBC @Sahara @UNI @iimc alumnus, Views are personal and have nothing to do with my professional association

Noida, India
Joined February 2011
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India is conscious of and committed to its role in climate action.
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SCOOP: Major U.S. banks are detecting unauthorized third-party AI agents inside customer accounts, including some attempting to take actions that appear to be independent of user instructions, sources told Axios. The findings have alarmed banking executives, who are racing to restrict access to their systems as AI moves at a velocity faster than financial institutions can respond, multiple industry and bank executives told Axios. Several banks are now preparing for worst-case and even “day after” scenarios, including how to rapidly secure or restore customer accounts if things go wrong, the people said. Several bank executives told Axios they're struggling to distinguish between human users and AI agents. One executive said banks also struggle to determine whether agents are authorized by customers or potentially operating without their permission, more akin to rogue agent behavior. Read my latest for Axios here: axios.com/2026/10/22/ai-agen…
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#ExpressInvestigation | Bihar has been dry for nearly a decade, but its drug problem is growing. An investigation by The Indian Express looks at the changing narcotics market, the rise in drug cases and what it means for a state already under pressure from addiction and limited treatment facilities. Read: indianexpress.com/article/ex… Written by: Himanshu Harsh
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The Ministry of Information and Broadcasting has advised all private satellite TV channels to strictly comply with the Programme Code, warning that violations may invite action under the Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995. Channels have been asked to ensure responsible reporting, avoid live coverage of anti-terror operations, exercise caution with violent visuals, protect sexual offence victims’ identities, use authentic maps of India and prevent communal or anti-national content. The advisory also calls for caution in using AI tools and stronger editorial oversight.
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सौ बात की एक बात ये कि क्या चीन में जनसंख्या के झूठे आंकड़े जारी किये जाते रहे हैं इतने साल तक? क्या चीन की अर्थव्यवस्था का महल ताश के पत्तों का है? एक ऐसी ख़बर से चीन से आ रही है जिसपर दुनिया भर में विश्लेषण हो रहा है कि क्या चीन ऐसी चिंगारी सुलग रही है जो अगर भड़क गई तो ऐसा धमाका कर सकती है कि सब धराशायी हो सकता है? वैसे तो चीन में ख़बरों पर ऐसा कंट्रोल होता है कि अंदर क्या चल रहा है वो पता नहीं चल पाता, लेकिन नोट किया गया है कि एक ऐसी ख़बर को वहां दबाया जा रहा है जो वहां लोगों में बढ़ रही ज़बरदस्त नाराज़गी की ओर इशारा कर रही है। ये चिंगारी सुलगना शुरू हुई थी 7 साल पहले 2019 में। वहां एक रिपोर्ट आई थी। उस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि वहां पेंशन का जो पैसा कर्मचारियों को जमा करवाना पड़ता है वो 2027 के बाद से गिरना शुरू हो जाएगा और 2035 तक पूरा ख़त्म हो जाएगा। ख़त्म हो जाएगा पेंशन का पैसा। क्यों? क्योंकि चीन ने इतने दशकों तक एक नियम बनाया हुआ था पब्लिक के लिए। कि वो सिर्फ़ एक बच्चा पैदा कर सकते हैं। वही नियम आज चीन के ऊपर तलवार की तरह लटक रहा है। चीन ने 1979-80 के आसपास एक-बच्चा नीति शुरू की थी क्योंकि आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही थी और सरकार को डर था कि इतने लोग होंगे तो देश तरक़्क़ी कैसे करेगा। तो फ़रमान जारी कर दिया गया कि सब एक ही बच्चा पैदा कर सकते हैं। चीन तो चीन है। लोकतंत्र तो है नहीं। सरकार ने कह दिया एक ही बच्चा पैदा कर सकते हैं तो एक ही बच्चा करने लगे लोग। बच्चों की संख्या कम होती चली गई तेज़ी से और काम करने वाली उम्र के लोगों की संख्या ज्यादा हो गई। परिवारों को कम बच्चों की परवरिश करनी पड़ती थी, इसलिए वो ज्यादा बचत कर पाते थे और ज्यादा लोग फैक्ट्रियों और नौकरियों में लग गए। 1980 से 2000 तक चीन ने बहुत ही तेज़ी से तरक़्क़ी की। अब वही नीति उल्टा असर दिखा रही है। काम करने वाली उम्र के लोगों की संख्या 2015 के आसपास अपने चरम पर पहुंचकर अब बहुत ही तेज़ी से घट रही है। बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। अमेरिका में चीनी मूल के एक जनसंख्या एक्सपर्ट हैं यी फुशियान। वो कह रहे हैं कि चीन की जनसंख्या उतनी है ही नहीं जितनी बताई जाती है। बताते हैं 140 करोड़ की आबादी, जबकि यी फ़ुशियान कह रहे हैं कि असल आबादी 127 करोड़ से ज़्यादा नही है और लगातार घटती जा रही है। वो बच्चों के टीके कितने लगे और स्कूल में कितने बच्चों का दाख़िला हुआ उन सरकारी आंकड़ों के आधार पर ये कह रहे हैं कि आबादी उतनी है नहीं जितनी चीन बता रहा है। और फिर जो ख़तरे की घंटी बजाने वाली ख़बर थी वो आ गई। चीन की सरकार ने रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फ़ैसला सुना दिया। यानी साफ़ है कि वहां बुज़ुर्ग ज़्यादा होते जा रहे हैं और पैनिक बढ़ता जा रहा है सरकार में। कुछ टाइम पहले तक काम करने वाले हर दो लोग, पेंशन पाने वाले एक आदमी का बोझ संभाल रहे थे। लेकिन अब काम करने वाली उम्र के लोग ही कम होते जा रहे हैं। इतने दशकों से एक ही बच्चा पैदा होता गया है परिवारों में तो अब युवा ही कम हो गए हैं। फ़ैक्टरियां तो बना दीं पूरी दुनिया के लिए चीन ने। उनमें काम कौन करेगा? और इतने सारे लोग जो पहले काम कर रहे थे उनकी पेंशन कहां से आएगी? तो रिटायरमेंट की उम्र बढ़ा दी सरकार ने। 75 साल में पहली बार रिटायर होने की उम्र बढ़ा दी। लोगों में नाराज़गी है। लेकिन कोई कुछ बोल तो सकता नहीं चीन में। लेकिन सरकार को अंदाज़ा तो है कि इससे लोगों में विद्रोह हो सकता है। तो रिटायर होने की उम्र एक साथ नहीं बढ़ाई। धीरे-धीरे कर के बढ़ेगी 15 साल तक। वहां पुरुषों और महिलाओं की रिटायर होने की उम्र अलग होती है। पुरुषों के लिए पहले रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी, अब उसे 63 साल तक बढ़ाया जा रहा है। महिलाओं के लिए ये उम्र 55 से बढ़ाकर 58 की जा रही है। लेकिन बढ़ोतरी बहुत छोटी-छोटी किस्तों में हो रही है। हर चार महीने में एक महीने जोड़ दिया जा रहा है रिटायर होने की उम्र में। इस तरह 2039-40 के आसपास रिटायर होने की नई उम्र पूरी तरह लागू हो जाएगी। इसके साथ ही काम करते वक़्त पेंशन के लिए जो सैलरी का हिस्सा देना पड़ता है वो भी बढ़ाया जा रहा है। यानी चीन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। 2035 आते-आते सब कुछ ख़त्म ना हो जाए उसकी तैयारी तो चीन कर रहा है लेकिन लोगों में काफी नाराज़गी दिख रही है। खुला विद्रोह या सड़कों पर आंदोलन वहां तो होने नहीं देती सरकार, लेकिन चिंगारी सुलग रही है इसके कई संकेत मिल चुके हैं। जब रिटायर होने की उम्र बढ़ाने के फ़ैसले की सरकार ने घोषणा की तो वहां के सोशल मीडिया पर तो लोगों हैशटैग बनाकर करोड़ों मेसेज डाल दिये। वहां बाक़ी दुनिया में जो सोशल मीडिया चलता है उसको चलने भी नहीं देती सरकार। उनका अपना सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म है वीबो, उसपर लोगों ने बहुत ही तीखा लिखना शुरु कर दिया। करोड़ों बार मेसेज फॉर्वर्ड हो गए। कई लोगों ने लिखा कि युवाओं के लिए नौकरियां पहले से कम हैं, अब बुज़ुर्ग और देर तक काम करेंगे तो युवाओं को और नुकसान होगा। पब्लिक कहने लगी कि जब पैदा हुए तो कहा गया कि आबादी ज्यादा है, जब बच्चे पैदा करने का समय आया तो कह रहे थे एक बच्चा ही कर सकते हो, और अब रिटायर होना चाहते हैं तो कह रहे हैं लोग कम हैं और काम करो। लेकिन सड़कों पर किसी को आने नहीं दिया गया और ये सब विरोध ऑनलाइन ही रहा और उसे जल्दी सेंसर भी कर दिया गया। लेकिन चीन की ताक़त ही उसकी फ़ैक्टरियां हैं, और उन्हीं पर ख़तरा खड़ा हो गया है ये ज़्यादा देर तक छुपा नहीं पा रही चीन की सरकार। युवा कम होते जा रहे हैं और बुजुर्ग ज्यादा होते जा रहे हैं, तो फैक्ट्रियों में काम कौन करेगा? चीन की तरक़्क़ी ही सस्ती मज़दूरी पर हुई है अब तक। अचानक सारा प्लैन ध्वस्त होता जा रहा है। IMF जैसी संस्थाओं के अनुमान कहते हैं कि सिर्फ आबादी के बुढ़ापे से ही आने वाले सालों में सालाना विकास दर 2% तक गिर सकती है। चीन AI और रोबॉट का सहारा लेने का प्लैन बना रहा है। कि मज़दूर कम पड़ेंगे तो रोबॉट फ़ैक्टरियां संभाल लेंगे। लेकिन सामान ख़रीदने वाले भी तो जवान लोग ही होते हैं। वो बाज़ार भी तो छोटा होता जा रहा है चीन के अंदर अगर बुज़ुर्ग ही बुज़ुर्ग हो जाएंगे तो। यानी चीन को अपना सामान दुनिया के दूसरे देशों को बेचना ही पड़ेगा नहीं तो उसका सारा फ़ैक्टरियों का म़ॉडल ही धराशायी हो जाएगा। यानी ख़रीदने वालों की ताक़त बढ़ती चली जाएगी और सामान बेचने वाले चीन को झुकने पर ये ताक़त मजबूर कर सकती है। अभी तो हालत ये है कि चीन ब्लैकमेल करता है ख़रीदने वाले देशों को। ये सारा खेल पलट सकता है। चीन की GDP बढ़ने की रफ़्तार पहले ही धीमी पड़ चुकी है। रेलगाड़ी का कोयले का इंजन याद है आपको? शोले फ़िल्म देखा होगा अगर याद ना हो तो। कैसे भर-भर कर कोयला डालना पड़ता था इंजन को तेज़ी से दौड़ाने के लिए याद है? वही हाल है चीन का। इंजन को चलाने वाला कोयला भी कम होता जा रहा है और जय और वीरू जैसे जवान भी नहीं आ रहे कोयला डालने के लिए। गब्बर सिंह जब पूछेगा कि कितने आदमी थे? तो सांभा बताएगा कि सरदार एक टाइम पर तो 140 करोड़ होते थे,लेकिन सब बूढे हो गए। सौ बात की एक बात। hindi.news18.com/news/knowle…
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सौ बात की एक बात ये कि युरोप में जगह-जगह जो आंदोलन हो रहे हैं वो युवाओं की वजह से हो रहे हैं या बुज़ुर्गों की वजह से हो रहे हैं? फ़्रांस और युरोप में कई जगह जो ये आंदोलन हो रहे हैं, हिंसा हो रही है, ये सब जेन ज़ी के विरोध प्रदर्शन बताए जा रहे हैं वो हक़ीक़त तो है लेकिन पूरी कहानी नहीं है। असली वजह एक ऐसा बुनियादी बदलाव है जिसको हर देश को समझने की ज़रूरत है। फ़्रांस में इस समय जो विरोध चल रहे हैं वजहें जो बताई जा रही हैं वो तो ये बताई जा रही हैं कि स्कूलों में टीचरों की भारी कमी चल रही है, हर क्लासरूम में बहुत ज़्यादा बच्चे भरे जा रहे हैं, स्कूलों की इमारतें टूटी-फूटी हालत में हो गई हैं। तो स्कूलों का बजट बढ़ाया जाए। पुर्तगाल में हज़ारों लोग सड़कों पर आ गए हैं क्योंकि वहां मकानों की क़ीमतें बढ़ गई हैं, किराए आसमान छू रहे हैं, वेतन कम हैं। इटली में मिलान और अन्य शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं कि स्कूलों के लिए हालत ख़स्ता लगी पड़ी है, किराए बहुत बढ़ गए हैं। बेल्जियम में छात्र निकल आए हैं सड़कों पर कि यूनिवर्सिटी की फ़ीस बढ़ा दी गई है, सरकार ने बजट कम कर दिया है। ऐल्बेनिया में छात्र विश्वविद्यालय की खराब हालत और ऊंची फीस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। स्पेन में भी लोगों को मकान नहीं मिल पा रहे, किराए बहुत बढ़ गए हैं। यानी सब जगह एक बड़ी वजह ये दिख रही है विरोध की कि युवाओं को जो सरकार से मिलता है उसका बजट सरकार उतना नहीं दे रही जितना देना चाहिए। तो समझने वाली बात ये है कि बजट जा कहां रहा है? इतना ज़्यादा विरोध है तो वहां की सरकारें स्कूलों कॉलेजों का बजट बढ़ा क्यों नहीं रहीं? वहां तो सरकारें मकान बनाने पर बहुत पैसा ख़र्च करतीं थीं ताकि लोगों को रहने की दिक़्क़त ना हो। तो ऐसा-कैसे हो रहा है कि युरोप के देशों को पैसा कम पड़ रहा है? वो कोई ग़रीब देश थोड़े ही हैं। और युरोप में तो टैक्स भी बहुत लेती हैं सरकारें। और विरोध की बड़ी वजह ये भी है। क्योंकि लोग टैक्स बहुत देते हैं और अब तक तो ये मॉडल था कि टैक्स सरकार लेती थी और उसके बदले में लोगों को सुविधाएं मिलती थीं। स्कूल मिलते थे, मकान मिलते थे। वो नहीं मिल पा रहा इसलिए विरोध इतना उग्र होता जा रहा है। यहां के लोग वहां के टैक्स सुन लें होश ही उड़ जाएं। फ़्रांस में तरह-तरह के टैक्स इतने हैं कि एक आम वर्कर को औसत 47% टैक्स देना पड़ता है, मतलब यूं समझ लो कि आधी कमाई टैक्स में चली जाती है। बेल्जियम में औसत टैक्स 53% के क़रीब है, इटली में भी लगभग 47% के आसपास है, स्पेन और पुर्तगाल में भी लगभग 40% कमाई टैक्स में चली जाती है आम पब्लिक की। इसलिए सब लोग ग़ुस्से में हैं कि सुविधाएं तो दुरुस्त करो। तो इतना सारा टैक्स ले कर ये सारे युरोप के देश अब तक इतनी अच्छी सुविधाएं दे पा रहे थे तो अब क्यों नहीं दे पा रहे? उसकी वजह ये है कि वहां टैक्स देने वाले कम होते जा रहे हैं कई साल से, और टैक्स के पैसे से सुविधाएं लेने वाले बढ़ते जा रहे हैं। सिर्फ़ शरणार्थियों की बात नहीं है कि सिरिया से, इराक़ से, अफ़्रीका से, जगह-जगह से मुसलमान शरणार्थी आ गए हैं युरोप में तो उनपर ख़र्च हो रहा है। ये नैरेटिव युरोप की कई पार्टियां ज़रूर बना रही हैं। अब तो ट्रंप ने भी कह दिया कि फ़्रांस में ये सब हिंसा इसीलिए हो रही है। लेकिन ये सिर्फ़ एक फ़ैक्टर है। जो बड़ा फ़ैक्टर है उसकी बात नहीं हो रही है और उसको समझने की ज़रूरत है। टैक्स देने वाले इसलिए कम हो गए हैं युरोप में क्योंकि टैक्स कौन देता है? जो काम करते हैं। और काम कौन करते हैं? जो काम करने की उम्र के होते हैं। युरोप में लोगों ने कई दशकों से बच्चे ही पैदा करने कम कर दिए थे। जनसंख्या ही घटती जा रही है। तो हो क्या गया है कि वहां बुज़ुर्ग ज़्यादा हो गए हैं। तो बजट कहां जा रहा है? पेंशन में। तनख़्वाहें नहीं बढ़ा पा रही सरकारें। क्योंकि पैसा तो पेंशन में जा रहा है। अस्पतालों में जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में जा रहा है। स्कूलों की मरम्मत कहां से हो? टैक्स तो मोटा ले रहे हैं। 50%से ज़्यादा टैक्स कहां से ले लें? लेकिन काम करने की उम्र के लोग ही उतने नहीं है। बुज़ुर्ग इतने हो गए हैं। वो टैक्स देते नहीं। उनको पेंशन देनी पड़ती है क्योंकि उन्होंने जब काम किया तो इतना मोटा-मोटा टैक्स दिया था। उनके इलाज पर अस्पतालों में ख़र्च करना पड़ता है क्योंकि उन्होंने इतना मोटा-मोटा टैक्स दिया था। लोग बच्चे कम पैदा कर रहे हैं और मेडिकल सुविधाएं और रिसर्च ऐसी हो गई है कि लोग ज्यादा लंबे समय तक जी रहे हैं। युवा काम करने वालों की संख्या कम हो रही है और बुज़ुर्गों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। फिर भी फ़्रांस में बजट का लगभग 12% सरकरा शिक्षा पर ख़र्च करती है। लेकिन उसमें 32% कहां चला जाता है? टीचरों और दूसरे कर्मचारियों की पेंशन में। यानी एक तिहाई पैसा तो पेंशन देने में चला जाता है, नए टीचरों की भर्ती कहां से होगी? स्कूल कहां से बनेंगे? स्कूलों की मरम्मत कैसे होगी? और स्कूलों के टीचरों की पेंशन की ही बात नहीं है, फ्रांस में तो देश की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 14% ख़र्च ही पेंशन पर हो रहा है सरकार का। कुछ टाइम पहले आपको याद होगा शायद इसी वजह से राष्ट्रपति मैक्रों की सरकार ने रिटायरमेंट की उम्र 62 साल से बढ़ाकर 64 साल करने की कोशिश की थी। पेंशन का ख़र्च कम करने के लिए ये कोशिश थी। लेकिन लाखों लोग सड़कों पर आ गए थे कि पहले ही 62 साल परल रिटायर हो रहे हैं, 64 तक क्यों काम करेंगे? सरकार को फ़ैसला वापस लेना पड़ गया था। यही सिचुएशन यूरोप के ज़्यादातर देशों है। जर्मनी में, स्पेन में, इटली में सब जगह बुज़ुर्ग ज़्यादा हो गए हैं। लोगों ने इतने सालों तक बच्चे ही पैदा नहीं किए। या कम पैदा किये। अब उन सबको पेंशन देनी है, उनके इलाज के लिए अस्पताल चलाने हैं, लेकिन उनकी जगह काम करने के लिए युवा उतने आए नहीं नहीं क्योंकि उनके बच्चे ही नहीं थे उतने। तो टैक्स कौन देगा कि पेंशन का पैसा दे सकें? अब आ जाइए सरकार पर दबाव पर। जब रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था फ़्रांस की सरकार ने तो फ़ैसला वापस लेना पड़ा था। तो वो दबाव क्यों काम कर गया सरकार पर और जेन ज़ी क्यों नहीं दबाव डाल पा रहे इतनी हिंसा के बाद भी? क्योंकि फ़्रांस के वोटरों में 30% यानी लगभग एक तिहाई 65 साल से ज़्यादा उम्र के हैं। यानी हर तीन में एक वोटर तो बुज़ुर्ग है वहां पर। और 25 साल से कम कितने वोटर हैं? सिर्फ़ 11%, 30 साल से कम उम्र वाले भी सिर्फ़ 17% वोटर ही हैं। यानी 30% लोग तो 65 साल से ज़्यादा उम्र के हौं और सिर्फ़ 17% 30 साल से कम उम्र के हैं। 25 साल से कम वाले तो 11% ही हैं। तो कौनसा वोटबैंक बड़ा हुआ? चुनावों का तो हिसाब-किताब आप जानते ही हो। ऊपर से बुज़ुर्ग लोग तो वहां पक्का वोट देने जाते हैं, युवा तो उतनी तादाद में हैं भी नहीं और जितने हैं वो वोट देने उतने जाते भी नहीं। ये है हक़ीक़त के पीछे की हक़ीक़त। जनसंख्या बढ़ना ही समस्या नहीं होती। जनसंख्या घटना और तेज़ी से घटना तो बहुत ही बड़ी समस्या हो जाती है। सौ बात की एक बात। hindi.news18.com/news/knowle…
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One conversation. Every question that matters to India. @SecRubio, in conversation with me, exclusively on Network18 channels at 9 pm tonight. @StateDept @USAndIndia @CNNnews18 @CNBCTV18Live @firstpost @News18India
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🇺🇸🇮🇳America’s top diplomat. India’s toughest questions. Network18 के एडिटर-इन-चीफ @18RahulJoshi की अमेरिका के विदेश मंत्री @marcorubio से बड़ी एक्सक्लूसिव बातचीत। भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े अहम सवालों और दोनों देशों के भविष्य की राह पर होगी खास चर्चा। 📺 आज रात 9 बजे, सिर्फ News18 India पर। #MarcoRubio #IndiaUSRelations #Network18 #BigExclusive
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हो जाईए तैयार… आज रात 9बजे Editor-in-chief @18RahulJoshi के साथ अमेरिका के @SecRubio का साक्षात्कार। हर सवाल जो देश के मन में हैं… देखिए @News18India पर
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Dear Delhi Traffic police, this James Bond is on the road near Chhatarpur metro station, right now. @dtptraffic @DelhiPolice
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This week, our Hindu neighbors celebrate the Goddess Durga during the festival of Navaratri.  Our neighbors will dance Garba, venerate the Goddess Durga with Sindur Khela, receive Tika from elders, set up Golu in their homes, and so much more. Whether your family calls it Durga Puja, Dashain, Dussehra, or Navratri, may this festival mark a season of reflection and renewal.
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🇮🇹 STRAIGHT OUT OF AN ACTION MOVIE! Italy BLEW UP a massive section of a highway bridge, and the whole thing collapsed in SECONDS. Engineers planted explosives inside the Tevere Viaduct near Viterbo, bringing down 13 of its 33 spans in a spectacular controlled demolition. The bridge stretches nearly 1.4 KILOMETERS, and the explosives were carefully positioned to make the roadway fall STRAIGHT DOWN without destroying the neighboring structures. The operation is part of a €41.5 MILLION project to rebuild and reinforce the viaduct. Writer: Sol
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A Lufthansa 747 narrowly avoided a tail strike during an aborted landing at Los Angeles International Airport.
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JUST IN 🚨: American Scientists Restored Pancreatic Beta Cells that Naturally Produce Insulin and Cured Diabetes Completely.
Readers added context they thought people might want to know
This is a mouse study by City of Hope researchers. They reprogrammed the immune system and used growth factors to regenerate beta cells, virtually curing type 1 diabetes in mice. It has not cured diabetes in humans. diabeteshealth.com/reprogrammed-c…
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Hey listen you fucktard @elonmusk : no one gives a monkey’s toss about you. No one. Not in China. Not in India. And not even in your adopted United States. And remember we are India. We invented the Kamasutra so we can screw you in positions that even @SpaceX can’t imagine!
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सवाल सुनते ही भड़कीं जया बच्चन... रिपोर्टर का माइक झटक दिया, देखें वीडियो @arunsingh4775 | Jaya Bachchan
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IIMCAA Connections 2.0 | Dharamshala 🌄✨ Where conversations turn into connections, old friendships find new stories, and the IIMCAA family comes together once again. ❤️ #IIMCAA #IIMCAAConnections #Dharamshala @IIMCAA
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Dharamsala trip. IIMC friends and Seniors @dmalok @RiteshIIMC @prabhash_jha13
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Connections 2.0 Dharamshala 2026 2nd to 4th October, 2026 Dharamshala, Himachal Pradesh #IIMC #IIMCAA #Connections #HimachalPradesh #Dharamshala
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